शिमला, सुरेंद्र राणा: पंजाब दस्तक रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बजट सत्र की समाप्ति के तुरंत बाद उद्योगों के खिलाफ कड़ा अभियान छेड़ने का एलान किया है। मंत्री ने कल शिमला में स्पष्ट किया कि प्रदेश में चल रहे उद्योगों को अब हर हाल में 70 प्रतिशत रोजगार हिमाचलियों को देना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कागजी आंकड़ों पर भरोसा नहीं करेगी, बल्कि अब जमीनी स्तर पर इसकी सघन जांच (Scurtini) शुरू की जा रही है।कुटाई (सख्त कार्रवाई) के निर्देश: रुकेंगी रियायतेंउद्योग मंत्री ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि जो भी उद्योग स्थानीय युवाओं को नौकरी देने में आनाकानी कर रहे हैं या नियमों की “कुटाई” (उल्लंघन) कर रहे हैं, उन्हें दी जाने वाली सभी सरकारी रियायतें (Subsidies) तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएं। इसमें बिजली, पानी और निवेश पर मिलने वाली छूट शामिल है। मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि “लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”CSR फंड के खर्च का होगा ऑडिटरोजगार के साथ-साथ सरकार अब कंपनियों के सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड के खर्च की भी कड़ाई से जांच करेगी।कहाँ खर्च हुआ पैसा: सरकार यह देखेगी कि उद्योगों ने सीएसआर का करोड़ों रुपया वास्तव में विकास कार्यों पर खर्च किया है या केवल कागजों में खानापूर्ति की है।पारदर्शिता: अब उद्योगों को अपने सामाजिक खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना होगा।स्थानीय युवाओं का हक सर्वोपरिहर्षवर्धन चौहान ने कहा कि हिमाचल के संसाधनों का उपयोग करने वाले उद्योगों की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे यहाँ के युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता दें। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में जाकर औचक निरीक्षण करने और डिफ़ॉल्टर उद्योगों की सूची तैयार करने के आदेश दे दिए हैं।
