ऐतिहासिक फैसला: मुख्यमंत्री ने अपनी 50% सैलरी की स्थगित; मंत्रियों, विधायकों और IAS-IPS लॉबी पर भी गिरी गाज

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ऐतिहासिक फैसला: मुख्यमंत्री ने अपनी 50% सैलरी की स्थगित; मंत्रियों, विधायकों और IAS-IPS लॉबी पर भी गिरी गाज
​विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
​मुख्यमंत्री का बड़ा कदम: अपनी 50% सैलरी की स्थगित
​हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में एक ऐसा साहसी निर्णय लिया है, जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मुख्यमंत्री ने स्वयं की सैलरी का 50% हिस्सा स्थगित करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। इसके साथ ही सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए मंत्रियों के वेतन में 30% और विधायकों (MLAs) के वेतन में 20% की राशि को स्थगित करने का फैसला लिया है।
​नौकरशाही पर भी असर: IAS, IPS, IFS और HODs की सैलरी भी हुई स्थगित
​’पंजाब दस्तक’ को सचिवालय के भीतर से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस फैसले की सबसे बड़ी मार प्रदेश की उच्च नौकरशाही पर पड़ी है। इसमें IAS, IPS, IFS अधिकारियों सहित प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों (HODs), बोर्डों-निगमों और विश्वविद्यालयों के बड़े अधिकारियों की सैलरी का भी 30% और 20% हिस्सा स्थगित किया गया है। इस निर्णय से इन शक्तिशाली अधिकारियों के बीच भारी रोष और गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
​प्रभावित अधिकारियों का ‘3% लॉबी’ पर दबाव: उकसाने की राजनीति शुरू
​सचिवालय के गलियारों में इस समय सबसे बड़ी चर्चा यह है कि जिन अधिकारियों और मंत्रियों की सैलरी का 30% और 20% हिस्सा स्थगित हुआ है, वे अब पर्दे के पीछे से उन 3% शीर्ष अधिकारियों पर भारी दबाव बना रहे हैं जो शासन व्यवस्था की मुख्य धुरी हैं। ये प्रभावित अधिकारी उन्हें लगातार उकसा रहे हैं कि ‘तुम लोग कुछ करो, सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलो और इस फैसले का विरोध करो।’ मकसद यह है कि इन चुनिंदा रसूखदार अधिकारियों के माध्यम से सिस्टम पर दबाव बनाया जा सके ताकि इस फैसले को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर किया जा सके।
​आम जनता में मुख्यमंत्री का बढ़ा कद; ग्रामीण क्षेत्रों में भारी उत्साह
​जहाँ एक तरफ बड़े अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों के बीच इस फैसले को लेकर खींचतान चल रही है, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल की आम जनता इस निर्णय से बेहद गदगद है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और आम नागरिकों के बीच मुख्यमंत्री के इस निर्णय को जबरदस्त जन-समर्थन मिल रहा है। जनता का मानना है कि जब मुखिया खुद अपनी आधी सैलरी स्थगित कर रहा है और बड़े अफसरों व नेताओं पर कैंची चल रही है, तो यह प्रदेश के हित में लिया गया अब तक का सबसे ईमानदार कदम है।

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