अमरीका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में पैदा हुए व्यवधान को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस संकट के बीच, भारत सहित 60 से अधिक देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग को फिर से खोलने का रास्ता तलाशने के लिए एक एमरजेंसी बैठक की। ब्रिटेन के नेतृत्व में हुई इस वर्चुअल बैठक में कूटनीतिक और आर्थिक विकल्पों यानी ‘प्लान बी’ पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। यह बैठक इस आशंका के बीच आयोजित की गई कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जलमार्ग तक पहुंच सुनिश्चित किए बिना ही अपने सैन्य अभियानों को समाप्त कर सकते हैं। भारत की ओर से इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रतिनिधित्व किया और वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में बड़ा बयान देते हुए विदेश सचिव ने कहा है कि इस संकटग्रस्त जलमार्ग में अपने नाविकों की जान गंवाने वाला वह अब तक इकलौता देश है। भारत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल समाधान की मांग की है। विदेश सचिव ने जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर मुक्त और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है, क्योंकि मौजूदा हालात वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत भी इस संकट का असर झेल रहा है और इससे निकलने का एकमात्र रास्ता कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण समाधान है, जिसमें सभी पक्षों के बीच संवाद जरूरी है।होर्मुज संकट में अब तक सिर्फ भारत के ही नागरिक मारे गए हैं। विदेश सचिव ने स्पष्ट कहा कि यह संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्त्वपूर्ण बैठक में भारत के साथ फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और यूएई के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से नेविगेशन की स्वतंत्रता और निर्बाध ट्रांजिट के महत्त्व को पुरजोर तरीके से उठाया और ऊर्जा सुरक्षा पर इसके सीधे प्रभाव को रेखांकित किया। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा संघर्ष के दौरान खाड़ी में मर्चेंट जहाजों पर हुए हमलों में जान गंवाने वाले नाविकों के मामले में वह एकमात्र प्रभावित देश है। विदेश सचिव ने तनाव कम करने और कूटनीति की ओर लौटने का आह्वान किया। साथ ही, भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत लगातार ईरान और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय कर रहा है। ईरान की सहमति के बिना सैन्य बल के प्रयोग का कोई खास समर्थन नहीं दिखा। इसके बजाय, देश संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता और संभावित प्रतिबंधों सहित समन्वित राजनयिक दबाव के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने फंसे हुए जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री गलियारे बनाने में आपसी सहयोग की वकालत की।बैठक से दूर रहा अमरीकाब्रिटेन की विदेश सचिव यवेटे कूपर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सैन्य हस्तक्षेप के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया। विशेष रूप से, संयुक्त राज्य अमरीका इस बैठक में शामिल नहीं हुआ। अमरीकी सहयोगियों ने इस बात पर चिंता जताई कि वाशिंगटन शायद होर्मुज को फिर से खोलने को प्राथमिकता न दे। अगले सप्ताह भाग लेने वाले देशों के सैन्य अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें इस बात पर विचार किया जाएगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने और बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए नौसैनिक बेड़े को कैसे तैनात किया जा सकता है।
