उमांशी राणा: ग्राउंड रिपोर्ट (हमीरपुर)सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में बीते कल पूर्व विधायक राजेंद्र राणा की सर्व कल्याणकारी संस्था द्वारा आयोजित ‘सैनिक सम्मान समारोह’ शौर्य और परंपरा का अद्भुत संगम रहा। इस आयोजन की भव्यता तब चरम पर पहुँच गई जब राजस्थान के मेवाड़ राजघराने से महाराणा प्रताप के प्रत्यक्ष वंशज लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ विशेष अतिथि के रूप में यहाँ पहुँचे। महाराणा प्रताप के स्वाभिमान की गाथा और वीर सैनिकों के सम्मान के इस मंच पर महामहिम राज्यपाल के साथ पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी शिरकत की।इस अवसर पर प्रदेश भर से आए मौजूदा और पूर्व विधायकों की भारी मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि राजेंद्र राणा की राजनैतिक और सामाजिक पकड़ आज भी प्रदेश स्तर पर बेहद मजबूत है। धर्मशाला सहित अन्य जिलों से आए नेताओं के जमावड़े ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में तब्दील कर दिया।परंतु, इतनी गहमागहमी और दिग्गजों के जमावड़े के बीच दो बार के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की अनुपस्थिति सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। यद्यपि आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य कारणों की वजह से धूमल जी आजकल सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से परहेज कर रहे हैं और घर पर आराम कर रहे हैं, लेकिन सुजानपुर की जनता और राजनैतिक विश्लेषक इस दूरी को इतनी सरलता से नहीं देख रहे हैं।वहीं, उनके सुपुत्र और पूर्व मंत्री अनुराग ठाकुर भी इस समारोह का हिस्सा नहीं बन सके। जानकारी के अनुसार, वे देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अंतरराष्ट्रीय CSPOC सम्मेलन (कॉमनवेल्थ देशों के अध्यक्षों का सम्मेलन) जैसे अति-महत्वपूर्ण संसदीय कार्यक्रम में व्यस्त थे।क्षेत्र के लोग दबी जुबान में यह सोच रहे हैं कि क्या यह वाकई केवल डॉक्टरों की सलाह और व्यस्तता है, या फिर इसके पीछे कोई गहरा राजनैतिक संकेत छिपा है? जिस मंच पर जयराम ठाकुर और मेवाड़ के वंशजों का ऐतिहासिक मिलन हो रहा हो, वहां क्षेत्र के सबसे कद्दावर नेता की दूरी लोगों के बीच कई नए सवाल छोड़ गई है। सैनिकों के सम्मान और राष्ट्रवाद को समर्पित इस भव्य आयोजन ने जहाँ एकता का संदेश दिया, वहीं धूमल जी की गैर-मौजूदगी ने हमीरपुर की राजनीति में एक अनकहा ‘सस्पेंस’ भी पैदा कर दिया है।हिमाचल की ताजा खबरों के लिए सब्सक्राइब और फॉलो करें: पंजाब दस्तक
