अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल का आयात अंद नहीं करने के मामले में भारत पर आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि वॉशिंगटन इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर उनकी नाराजगी से अवगत हैं।अपने हवाई जहाज एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि श्री मोदी रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार पर उनकी नाराजगी को जानते हैं। श्री मोदी एक बहुत अच्छे इनसान हैं और वह जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि वह व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी शुल्क बढ़ा सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब भारत और अमरीका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है और अमरीका ने भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगा रखा है। उल्लेखनीय है कि अमरीका के आयात शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत तक करने के बाद से श्री मोदी और ट्रंप के बीच तीन बार बातचीत हुई है। इस शुल्क वृद्धि से कपड़ा, रसायन और झींगा मछली जैसी चीजों के निर्यात पर असर पड़ा है।दोनों पक्षों के बीच व्यापार वार्ता जुलाई के अंत में तब विफल हो गई थी, जब भारत ने अपने कृषि बाजार को अमरीकी उत्पादों के लिए खोलने का विरोध किया था और भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान श्री ट्रंप की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। बातचीत हालांकि तब से जारी है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत भी चल रही है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25 फीसदी पेनल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है।भारत ने चार साल बाद रूस से घटाया तेल आयातभारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है। जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है। नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमरीकी प्रतिबंध लागू हुए हैं। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है।
