शिमला, सुरेन्द्र राणा: उत्तरी भारत का प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय लवी मेला, जो रामपुर बुशहर में हर मुख्य तौर पर हर साल 11 से 14 नवंबर तक मनाया जाता है। प्रथम चरण में यह मेला पहली नवंबर से अश्व प्रदर्शनी से आरंभ हो रहा है, जो तीन नवंबर को अश्व घुड़ दौड़ से संपन्न होगा। इसी दिन अश्व प्रदर्शनी का समापन क्षेत्रीय विधायक नंद लाल करेंगे। मेले का उद्घाटन राज्यपाल करेंगे और समापन मुख्यमंत्री। यह मेला लगभग 300 साल पुराना एक ऐतिहासिक और प्रमुख व्यापारिक मेला है। यह मेला उस समय की तिब्बत और बुशहर के तत्कालीन महाराज केहरी सिंह बीच हुए व्यापारिक संबंधों की याद में मनाया जाता है। इस मेले में यहाँ ऊन, पश्मीना, चिलगोजा,ऊनी वस्त्र, घोड़े, सूखे मेवे व अन्य वस्तुओं का बड़े पैमाने पर व्यापार होता था। यह मेला बुशहर रियासत के व्यापारिक गौरव की स्मृति और आधुनिक हिमाचल की सांस्कृतिक जीवंतता का परिचायक है। इस मेले का नाम लवी शब्द से आया है, जो ऊन के व्यापार के साथ जुड़ा है। यह मेला तब शुरू हुआ, जब तिब्बती व्यापारी लंबी और कठोर यात्राओं के बाद इस इलाके में अपनी वस्तुएं लाते थे। लवी मेले के प्रारंभिक वर्षों में मुख्यत: तिब्बती व्यापारी आते थे, जो तिब्बत और हिमाचल प्रदेश के बीच व्यापार करते थे।ये व्यापारी ऊन, पश्मीना, सूखे मेवे, खासकर चिलगोजा और अन्य वस्तुएं लेकर आते थे। साथ ही, हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रीय व्यापारी भी आते थे, जो नमक, गुड़, राशन, कपड़े और स्थानीय उत्पाद मेला में बेचते और खरीदते थे। और बदले में नमक, गुड़, राशन आदि लेकर अपने क्षेत्रों को लौटते थे।
मेले में आकर व्यापारी व्यापार के साथ-साथ घोड़ों का भी लेन-देन करते थे, खासकर चामुर्थी नस्ल के मजबूत घोड़े, जिन्हें पहाड़ का जहाज कहा जाता है। यह मेला उस समय के व्यापार नेटवर्क का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गया। तिब्बत सीमा बंद होने के बाद तिब्बत से व्यपारियों का आना बंद होने से इस मेले पर विपरीत असर पड़ा। इसके बाद इस मेले को बरकरार रखने के लिए वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री काल में इस मेले को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया। यह मेला न केवल व्यापार के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अब इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं जैसे कबड्डी, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, घोड़ा प्रदर्शनी और मिनी-मैराथन भी आयोजित की जाती है।
