शिमला, सुरेन्द्र राणा: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में हिमाचल के 41 दवा उद्योगों में निर्मित 60 तरह की दवाएं गुणवत्ता के पैमानों पर फेल हो गई हैं। इन दवाओं में केवल सामान्य श्रेणी ही नहीं, बल्कि दर्द निवारक, संक्रमण रोधी, मल्टी विटामिन, पेट के कीड़ों के इलाज, हृदय रोग, सीओपीडी के उपचार, अनिद्रा, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, एलर्जी, गैस्ट्रिक और तंत्रिका दर्द के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इनमें इंजेक्शन, लोशन और आई ड्रॉप्स जैसी संवेदनशील श्रेणियां भी पाई गई हैं, जिनका सीधा असर मरीजों पर पड़ सकता है।जुलाई माह में देश भर से जांचे गए कुल 151 दवा सैंपल में 143 मानक गुणवत्ता से कम और आठ नकली पाई गईं, जिनमें हिमाचल की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही। बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) क्षेत्र के साथ-साथ ऊना, कालाअंब, पांवटा साहिब, सोलन, परवाणु, नूरपुर और संसारपुर टैरेस स्थित उद्योगों से लिए गए नमूनों की जांच राज्य और केंद्रीय प्रयोगशालाओं में हुई, जिसमें पाया गया कि ये दवाएं लेबलिंग, घुलनशीलता, वजन समानता और स्टेरिलिटी जैसे बुनियादी मानकों पर खरी नहीं उतरीं। वहीं देश के अन्य राज्यों में बने 83 सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बिहार से सात व गाजियाबाद से एक सैंपल नकली दवा के रूप में चिन्हित हुआ, जिन्हें अनधिकृत कंपनियों ने दूसरे ब्रांड नाम का दुरुपयोग कर तैयार किया था।
राज्य औषधि नियंत्रक मनीष कपूर ने पुष्टि की है कि ड्रग अलर्ट में शामिल हिमाचल के सभी उद्योगों को नोटिस जारी कर संदिग्ध उत्पाद तुरंत बाजार से हटाने के आदेश दिए गए हैं और संबंधित सहायक औषधि नियंत्रकों को मौके पर जाकर निरीक्षण और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन इकाइयों के नाम बार-बार मासिक अलर्ट में आ रहे हैं, उनके खिलाफ जोखिम आधारित निरीक्षण अभियान चलाकर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
