शिमला, सुरेन्द्र राणा;
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश (पंजीकृत संख्या 16/89) में हाल ही में उपजे नेतृत्व विवाद पर न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए आत्मा राम शर्मा और हुकम सिंह ठाकुर को संगठन के नाम से किसी भी प्रकार का कार्य करने से रोक लगा दी है।
प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर और महासचिव भूप राम वर्मा ने जानकारी दी है कि 6 जुलाई को सुंदरनगर में कुछ स्वयंभू नेताओं द्वारा एसोसिएशन की तथाकथित कार्यकारिणी का अवैध व असंवैधानिक चुनाव किया गया था, जिसमें आत्मा राम शर्मा को प्रधान और हुकम सिंह ठाकुर को महासचिव घोषित किया गया। यह चुनाव बिना सात जिलों के वैध प्रतिनिधियों को सूचना दिए गुपचुप और मनमाने तरीके से कराया गया।
इस मामले में सुरेश ठाकुर और भूप राम वर्मा ने रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सर्विसेज के न्यायालय में याचिका दायर कर चुनावों को रद्द करने और अवैध रूप से चुने गए पदाधिकारियों को काम से रोकने की मांग की थी। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आत्मा राम शर्मा और हुकम सिंह ठाकुर को संगठन के नाम से कार्य करने से तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और उन्हें नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
न्यायालय के इस आदेश से वैध प्रतिनिधित्व करने वाली टीम ने संतोष जताया है। संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गंगाराम शर्मा, संगठन सचिव मदनलाल शर्मा, सलाहकार हरी चंद गुप्ता, शिमला जिला प्रधान भागचंद चौहान, महिला विंग की मीरा ठाकुर, प्रभा चौहान, और मीडिया प्रभारी सेन राम नेगी समेत तमाम पदाधिकारियों ने फैसले का स्वागत किया है।
गौरतलब है कि पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन का विधिवत और पारदर्शी चुनाव 8 जुलाई को कांगड़ा में मोहन सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था, जिसमें प्रदेशभर से आए लगभग 1400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस चुनाव में सुरेश ठाकुर को प्रदेश अध्यक्ष और भूप राम वर्मा को महासचिव चुना गया।
संगठन की ओर से हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व मुख्य सचिव को 18 सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा गया है। एसोसिएशन ने चेताया है कि अगर अगस्त महीने तक सरकार ने मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं की, तो सितम्बर के पहले सप्ताह से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी रूपरेखा 20 सितम्बर के बाद तय की जाएगी।
सुरेश ठाकुर और भूप राम वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ विरोधी गतिविधियों के चलते आत्मा राम शर्मा, हुकम सिंह ठाकुर, हरीश शर्मा और जगदीश दिनेश को एसोसिएशन से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही “कांगड़ा पेंशनर्स संघ” की मान्यता भी समाप्त कर दी गई है।
