कैंसर मरीज को हिमकेयर के तहत इंजेक्शन न मिलने पर मौत, मृतक की बेटी ने लगाई न्याय की गुहार, विपक्ष बोला गरीबों को मुफ्त इलाज़ से सुक्खू सरकार कर रही वंचित

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला में कैंसर मरीज को इंजेक्शन नहीं मिलने से मौत का मामला तूल पकड़ रहा है। मृतक की बेटी ने सोशल मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई है। मृतक की बेटी जाह्नवी शर्मा का कहना है कि सरकार की तरफ से हिमकेयर का पैसा जमा न होने पर उसके पिता को कैंसर के इलाज के लिए IGMC से इंजेक्शन नहीं मिला। एक महीने तक डॉक्टरों ने टाल मटोल की और बाहर से इंजेक्शन खरीदना उनके बजट में नहीं था जिसके चलते पिता की मृत्यु हो गई है।

वहीं मरीज की मृत्यु को विपक्ष ने हत्या करार देते हुए इसकी जाँच की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य विभाग में यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन कर रहे हैं जहां मरीजों को उपचार न मिलने पर मौत हो रही है।शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि दो साल में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई है। कैंसर मरीज को हिमकेयर सुविधा ना मिलने पर मौत हो गई है। पीड़ित की बेटी जाह्नवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दर्द को देश और प्रदेश के सामने रखा है।

पीड़ित कैंसर के रोगी थे और आईजीएमसी में इलाज चल रहा था। 1 महीने तक इंजेक्शन के लिए परिवार घूमता रहा लेकिन इंजेक्शन नहीं दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि हिमकेयर का पैसा नहीं मिला है ऐसे में सरकारी खर्च पर इंजेक्शन नहीं दिया जा सकता। परिवार ने पैसे जोड़े लेकिन तब तक पीड़ित की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री कहते फिरते हैं कि भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य में प्रदेश का बेड़ा ग़र्क कर दिया लेकिन सही मायने में वर्तमान कांग्रेस सरकार ने दो साल में प्रदेश का बेड़ा ग़र्क कर दिया है और गरीबों को मुफ्त इलाज़ से ही वंचित कर दिया है। सरकार गरीबों के साथ अमानवीय दृष्टिकोण अपना रही है।

वहीं प्रदेश में सीमेंट के दामों में पांच रुपए की बढ़ोतरी को लेकर जयराम ठाकुर ने कांग्रेस को याद दिलाया कि विपक्ष में रहते मुकेश अग्निहोत्री हल्ला करते हुए सांठ गांठ के आरोप लगाते थे लेकिन अब इनकी क्या सांठ गांठ हैं बताएं? जयराम ठाकुर ने कहा कि सीमेंट के दामों में महीने में दो दो बार बढ़ोतरी हो रही है लेकिन सरकार कीमतों को कम करने में नाकाम हैं।

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