शिमला, सुरेंद्र राणा: केंद्र सरकार ने करों और नीम कोटिंग शुल्कों को छोड़कर यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूरिया सब्सिडी योजना को जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
पैकेज में तीन वर्षों के लिए यूरिया सब्सिडी को लेकर लगभग 3.70 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने की प्रतिबद्धता है। य़ह बात आज शिमला में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कही । मोदी सरकार के इस निर्णय से किसानों को यूरिया की खरीद के लिए अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी और इससे उनकी लागत को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होने कहा कि नीम कोटिंग शुल्क और लागू करों को छोड़कर यूरिया की कीमत 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम यूरिया की बोरी होगा। जबकि बैग की वास्तविक कीमत लगभग 2200 रुपये है।
शिमला में पत्रकार वार्ता में डॉ बिंदल ने कहा कि भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित इस यूरिया सब्सिडी योजना के जारी रहने से किसानों को उर्वरक की अधिक कीमतों से बचाया है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर उर्वरक की कीमतें कई गुना बढ़ रही हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने उर्वरक सब्सिडी बढ़ाकर किसानों को राहत दी है
उन्होंने कहा की मोदी सरकार ने ये भी निर्णय लिया है कि 2025-26 तक 195 एलएमटी पारंपरिक यूरिया के बराबर 44 करोड़ बोतलों की उत्पादन क्षमता वाले आठ नैनो यूरिया संयंत्र चालू हो जाएंगे। इससे जमीन के पोषक तत्वों की क्षमता बढ़ती है और किसानों की लागत भी कम आती है। यूरिया का स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़कर 284 एलएमटी हो गई है। नैनो यूरिया संयंत्र के शुरू होने से वर्ष 2025-26 तक देश आत्मनिर्भर बन जाएगा।
