दिल्ली: हंगामे और नारेबाजी के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (विकसित भारत-जी राम जी) विधेयक, 2025 मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया। विपक्षी सदस्यों ने मनरेगा के स्थान पर इस विधेयक को लाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि सरकार अधिनियम के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाना चाहती है इसलिए यह विधेयक लाया जा रहा है। उनका कहना था कि मनरेगा में गरीब ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, सरकार उसके नियम बदलकर उन्हें इससे वंचित कर रही है। इससे पहले बिल पेश करते हुए शिवराज ङ्क्षसह चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। हम केवल महात्मा गांधी को मानते ही नहीं, उनके विचारों पर आधारित सरकार कई गरीब कल्याण की कई योजनाएं चला रही है। मनरेगा पर हमारी सरकार गरीबों पर पहले से अधिक खर्च किया। अब 125 दिन की गारंटी दी जाएगी, पहले 100 दिन की थी। हमारा संकल्प है गरीब का कल्याण, इसमें उसी संकल्प को पूरा करने का काम किया जाएगा। इसके प्रावधान में एक विकसित गांव का लक्ष्य है, जो गरीबों के कल्याण के लिए है।महात्मा गांधी ही राम राज्य चाहते थे। राम राज से विपक्ष भडक़ गए, यह समझ से परे है। इस दौरान विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच आकर विधेयक के विरोध में नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ने भारी हंगामे के बीच विधेयक को पेश किया गया। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने विधेयक पर सख्त आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि मनरेगा में पिछले 20 सालों में ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। इससे सौ दिन का रोजगार गरीब से गरीब लोगों को मिलता है। इसके तहत गरीब भाई-बहनों को रोजगार की गारंटी मांग के आधार पर निर्धारित होती थी। इसके लिए केंद्र से धन भी मांग के आधार पर मिलता था। अब इस विधेयक में केंद्र को इजाजत दी गई है कि कितनी पूंजी कहां भेजी जाए, जो संविधान विरोधी है। मनरेगा में 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र से आता था, अब 60 प्रतिशत केंद्र से आएगा, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी कम की जा रही है। हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ से बाहर है। इस काम में केंद्र सरकार को धन खर्च करना पड़ता है। इस विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए और सरकार को एक नया विधेयक लाना चाहिए। गहन जांच पड़ताल के लिए इसे स्थाई समिति के पास भेजा जाना चाहिए। उधर, द्रमुक के टीआर बालू ने कहा कि चूंकि यह महात्मा गांधी के नाम पर योजना थी, केंद्र सरकार महात्मा गांधी से घृणा करती है, इसलिए इसका नाम बदलना चाहती है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने इस विधेयक के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपति महात्मा गांधी के नाम से चल रही योजना बदलना सही नहीं है। मांग के बजाय आपूर्ति आधारित विधेयक बना दिया गया है। इसे प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि इस पर विस्तृत चर्चा की जा सके। कांग्रेस के शशि थरूर ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इससे हम कल्याण का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे। राष्ट्रपिता का नाम हटाना उचित नहीं है। मनरेगा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यक्रम था, जिसमें गरीबों का उत्थान मकसद था। इससे वित्त पोषण का 40 प्रतिशत भार राज्य सरकार पर आ जाएगा, जिससे गरीब राज्यों को दिक्कत आएगी।कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह संविधान विरोधी है। मनरेगा गरीबों को रोजगार की गारंटी देता है, लेकिन अब सिर्फ कागजों में रोजगार गारंटी रह जाएगा। उस मंत्री का नाम याद रखा जाएगा, जिसने महात्मा गांधी का नाम हटाया है। समाजवादी पार्टी के धर्मेन्द्र यादव ने विरोध करते हुए कहा कि लगातार केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी कम करके राज्यों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। इस देश का कोई भी नागरिक महात्मा गांधी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता है। इस विधेयक से महात्मा गांधी का अपमान है। राकांपा नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि हम नीति के बदलाव के विरोध में नहीं है। इसे संयुक्त समिति में भेजा जाए। महात्मा गांधी का नाम इसमें से न निकालें। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जो देशहित में विधेयक पारित करना है, वह करके रहेंगे। जब हम विधेयक के पुर:स्थापना का विरोध सीमित रूप से रखने की आवश्यकता है। विधेयक का नाम ङ्क्षहदी अंग्रेजी में हो सकता है, इसमें कोई दुरुपयोग नहीं है। उधर, सरकार ने बिल के बारे में सांसदों को समझाने के लिए बुधवार को एक घंटे का स्पेशल सत्र बुलाया है। उधर, कांग्रेस ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है।
