शिमला, सुरेन्द्र राणा: शिमला के हलोग धामी में दिवाली के दूसरे दिन सदियों से चली आ रही पत्थर के खेल की अनोखी परंपरा को आज भी पूरे उत्साह और जोश के साथ निभाया गया।दिवाली के दूसरे दिन 2 अलग-अलग क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे पर पत्थरों की बरसात करते हैं। यह सिलसिला तब तक चलता है, जब तक किसी पक्ष के किसी एक व्यक्ति का रक्त नहीं निकल जाता है ।चोट लगने पर व्यक्ति के खून को मां भद्रकाली के चबूतरे पर लगाया जाता है और खेल का समापन होता है।इस मेले में धामी में राज परिवार की तरफ से तुनड़ू, जठौती व कटेड़ू परिवार की टोली जबकि दूसरी ओर से जमोगी खानदान की टोली के सदस्य पत्थर बरसाते हैं। अन्य लोग पत्थर मेले को देख सकते हैं, लेकिन वे पत्थर नहीं मार सकते।इस बार भी पूरी रस्मों के साथ पत्थर खेल मेले का आयोजन हुआ और जमोगी टोली इस बार मेले में विजयी रही। करीब 40 मिनट तक चले पत्थर मार खेल में दोनों तरफ से जबरदस्त पथराव हुआ जिसमें कटेडू टोली के सुभाष के हाथ में पत्थर लगा जिसके बाद कटेड़ू टोली के सुभाष के खून से इस बार मां भद्रकाली का तिलक किया गया और खेल खत्म हुआ।
माना जाता है कि पहले यहां हर वर्ष भद्रकाली को नर बलि दी जाती थी लेकिन धामी रियासत की रानी ने सती होने से पहले नर बलि को बंद करने का हुक्म दिया था। इसके बाद पशु बलि शुरू हुई कई दशक पहले इसे भी बंद कर दिया गया।तत्पश्चात पत्थर का मेला शुरू किया गया।
