हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पास: वोटिंग के वक्त विपक्ष रहा मौन

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शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल विधानसभा में बुधवार देर शाम राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पास हो गया। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने थ्रू-वायस वोट इस प्रस्ताव को सदन में पास कराया। इस दौरान विपक्ष ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के सरकारी संकल्प का न समर्थन किया और न विरोध । सत्तापक्ष के विधायकों ने हां में हां भरी। स्पीकर ने प्रस्ताव पारित होते ही सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी। अब यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा।

इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने विधानसभा में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के प्रस्ताव पर तीन दिल चली चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने इस त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा मानते हुए केंद्र से 12000 करोड़ रुपए का विशेष आर्थिक पैकेज देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा तबाही का मंजर पहले कभी नहीं देखा। प्रदेश में 441 लोगों की जान गई और 39 लोग अभी भी लापता है।

CM ने कहा कि इस आपदा से 12 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। 16658 पशुओं की मौत, 2621 घर पूरी तरह नष्ट, 12 हजार से ज्यादा घरों को आंशिक नुकसान, 318 दुकानें, 238 झोपड़ियां, 540 घराट और 5917 गौशालाएं तबाह हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पौंग, पंडोह, पार्वती-2 डैम प्रबंधन को बिना सूचना पानी छोड़ने पर नोटिस जारी किए गए, क्योंकि इससे डाउन स्ट्रीम में भारी नुकसान हुआ है। सभी बांध प्रबंधन को पानी छोड़ने से पहले अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च से मई तक जब गर्मियां होती है। इस दौरान प्रदेश में नॉर्मल से 19 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। इससे मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी हो गई। 24 जून को जब मानसून आया। तो तबाही का दौर शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि सात से 11 जुलाई के बीच नॉर्मल से 436 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। 24 जून से 14 जुलाई तक नॉर्मल से 147 प्रतिशत और 11 से 14 अगस्त के बीच 157 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि NHAI की लापरवाही के कारण लारजी परियोजना बुरी तरह प्रभावित हुई। इससे 657 करोड़ की क्षति हुई। उन्होंने कहा कि तबाही के कारण टूरिज्म इंडस्ट्री को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। टूरिस्ट नहीं आने से सरकार को भी राजस्व के रूप में घाटा हुआ है।

 

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