ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा,कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है, लेकिन इसी बीच मतदाता सूची को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। राज्य में चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) के दौरान लगभग 5 लाख लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। नियमों की उलझन या जागरूकता की कमी?हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ लाखों नाम काटे गए हैं, वहीं दूसरी तरफ मतदाता पहचान पत्र में सुधार या नए पंजीकरण के लिए जनता का रुझान बेहद कम देखा गया। जानकारी के अनुसार, एक विशिष्ट ‘टर्म’ या श्रेणी के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में लोग जुड़ेंगे। लेकिन आंकड़ों ने प्रशासन को सोच में डाल दिया है—इतने बड़े राज्य में मात्र दो लोगों ने ही ऑनलाइन आवेदन किया है।लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेतएक ओर 5 लाख मतदाताओं का सूची से बाहर होना और दूसरी ओर डिजिटल माध्यमों के प्रति इतनी उदासीनता, कई सवाल खड़े करती है:क्या मतदाताओं को ऑनलाइन आवेदन की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है?क्या मतदाता केंद्रों पर जागरूकता अभियान का अभाव है?क्या बड़ी संख्या में नाम कटने से चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर पड़ेगा?चुनाव आयोग के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि मतदान से पहले अधिक से अधिक लोगों को सूची में शामिल किया जाए, ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व में सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।पंजाब दस्तक के लिए, पश्चिम बंगाल से ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा की रिपोर्ट।
