सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
शिमला: देवभूमि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार को सवर्ण समाज का आक्रोश पूरी तरह फूट पड़ा। राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित ठाकुर और राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में, करीब 600 किलोमीटर लंबी ‘सवर्ण समाज अश्वमेध न्याय यात्रा’ पूरी करने के बाद हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सीधे सचिवालय के बाहर आ डटे। UGC के नए प्रावधानों को तुरंत वापस लेने (UGC Rollback) और सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर सचिवालय के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला।
प्रशासनिक दमन की सारी हदें पार करते हुए पुलिस ने आक्रोशित जनता पर वाटर कैनन (पानी की बौछारें) का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग भी किया, लेकिन इसके बावजूद सवर्णों का हौसला नहीं डिगा और वे डटकर अपने तेवरों पर कायम रहे।
600 किलोमीटर की पदयात्रा का आज शिमला में दिखा असर
महीनों से सवर्ण समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित ठाकुर और अन्य दिग्गज नेताओं के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक ‘अश्वमेध न्याय यात्रा’ राज्य के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए बुधवार को शिमला पहुंची थी। इस लंबी पदयात्रा का असली और उग्र रूप आज गुरुवार को सचिवालय के बाहर देखने को मिला। हाथों में बैनर और तख्तियां थामे हज़ारों लोग “UGC रोलबैक” और “सवर्ण समाज को न्याय दो” के नारों के साथ आगे बढ़े।
सचिवालय के गेट पर चढ़े युवा, पुलिस से तीखी झड़प
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब कई जोशीले युवा और कार्यकर्ता सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए सीधे सचिवालय के मुख्य गेट पर जा चढ़े। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और तीखी झड़प हुई। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ीं और लाठियां भांजीं। इस कार्रवाई से कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन सवर्ण समाज के कार्यकर्ताओं ने पीछे हटने से साफ इंकार कर दिया और डटे रहे।
”स्वर्णों के भविष्य पर सीधा प्रहार बर्दाश्त नहीं”
प्रदर्शन स्थल पर डटे नेताओं ने दो टूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि UGC के नए प्रावधान सवर्ण वर्ग के युवाओं के भविष्य और मेधावी छात्रों के अधिकारों पर एक बहुत बड़ा कुठाराघात हैं। नेताओं ने कहा कि सरकार जितनी मर्जी लाठियां और पानी की बौछारें चला ले, दमन के इन हथकंडों से सवर्णों की इस क्रांति को दबाया नहीं जा सकता। जब तक सरकार इन काले कानूनों को पूरी तरह से वापस नहीं लेती और सवर्ण समाज की जायज मांगें नहीं मानती, तब तक यह संघर्ष और अधिक आक्रामक रूप अख्तियार करेगा।
