पंजाब कर्मचारी आंदोलन और 25 अक्टूबर की बैठक को लेकर चंडीगढ़ में प्रदर्शन

25 अक्टूबर की महा-बैठक पर टिकीं निगाहें: कर्मचारियों और पंजाब सरकार में तीखा टकराव, दमनकारी पत्र से भड़का रोष, सेक्टर-17 में विशाल रैली का ऐलान

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​चंडीगढ़ (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक, सेक्टर-17):
पंजाब में आम चुनाव सिर पर हैं, और ठीक इसी नाजुक मोड़ पर राज्य सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच का प्रशासनिक टकराव चरम सीमा पर पहुंच गया है। कर्मचारियों की जायज मांगों को हल करने के बजाय धमकियां देने और दमनकारी पत्र जारी करने की सरकारी नीति ने जलती आग में तेल डालने का काम किया है। मुख्य सचिव के साथ वार्ता विफल रहने और सरकार के सख्त तेवरों के बाद कर्मचारी संगठनों ने भी आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।


​25 अक्टूबर को परखा जाएगा सरकार का रवैया, होगा अगले संघर्ष का ऐलान
​कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि 25 अक्टूबर को कर्मचारी संगठनों की एक अति-महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में:
​सरकार के गंभीर और गैर-संजीदा बर्ताव को गहराई से परखा और जांचा जाएगा।
​सरकार की धमकियों का करारा जवाब देने के लिए अगले बड़े और कड़े संघर्ष (Action) का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।
​कर्मचारी नेताओं का कहना है कि न तो वे सरकार की धमकियों से डरेंगे और न ही नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन करने से पीछे हटेंगे। उनका हड़ताल और संघर्ष का कार्यक्रम पहले की तरह मजबूती से जारी रहेगा।


​सेक्टर-17 में आज गरजेगा कर्मचारियों का रोष: विशाल रैली का ऐलान
​सरकार द्वारा कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सूचियां बनाकर कार्रवाई करने का ‘थ्रेट लेटर’ (चेतावनी पत्र) जारी किए जाने के विरोध में सांझा मुलाजिम मंच ने कड़ा रुख अपनाया है।
​सांझा मुलाजिम मंच ने अपनी आपातकालीन बैठक करके बड़ा ऐलान किया है कि आज दोपहर सेक्टर-17, चंडीगढ़ में राज्य भर से जुटे कर्मचारी एकत्र होकर एक विशाल रैली करेंगे। इस रैली में मांगों को मानने के बजाय धमकियां देने की पंजाब सरकार की नीति के खिलाफ बड़े स्तर पर आवाज बुलंद की जाएगी।


​इतिहास दोहरा रही सरकार: क्या चुनावी माहौल में भारी पड़ेगा यह फरमान?
​यह पहला मौका नहीं है जब पंजाब सरकार ने कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने के लिए ऐसा पत्र जारी किया है:
​27 अगस्त का उदाहरण: इससे पहले जब संयुक्त तालमेल कमेटी ने 27 अगस्त को सामूहिक छुट्टी लेकर कामकाज ठप किया था, तब भी सरकार ने ऐसा ही कड़ा पत्र निकाला था।
​पीछे हटना पड़ा था सरकार को: उस समय कर्मचारियों के भारी विरोध और दोबारा हड़ताल के सामने सरकार को झुकना पड़ा था और वह पत्र वापस लेना पड़ा था।
​आज राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यही चर्चा गर्म है कि चुनाव सामने होने के बावजूद कर्मचारियों के गुस्से को शांत करने के बजाय ऐसे पत्र जारी करना क्या सरकार को भारी नहीं पड़ेगा? कर्मचारियों का बढ़ता रोष चुनावी माहौल में सरकार के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।


​बना हुआ है डेडलॉक, पंजाब दस्तक की नज़र
​पंजाब सरकार और लाखों कर्मचारियों के बीच पैदा हुआ यह डेडलॉक अब किस दिशा में जाता है, इसका फैसला 25 अक्टूबर की महा-बैठक में तय होगा।
​क्या सरकार एक बार फिर 27 अगस्त की तरह अपना पत्र वापस लेने पर मजबूर होगी या कर्मचारियों का यह संघर्ष और उग्र रूप धारण करेगा?

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