गांधी जयंती पर रिज से शुरू हुआ आंदोलन; अंबेडकर चौक पर अन्न-जल त्यागकर बैठे हजारों शिक्षक, शाम को हाथों में मोमबत्तियां थाम निकाला विशाल कैंडल मार्च
काजल (वरिष्ठ पत्रकार) — पंजाब दस्तक
चौड़ा मैदान (शिमला):
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदेश भर के प्राथमिक शिक्षकों ने अपनी बुनियादी मांगों और वजूद की रक्षा के लिए राजधानी शिमला में मौन सत्याग्रह का शंखनाद कर दिया। हिमाचल प्रदेश प्राइमरी टीचर फेडरेशन (HPPTF) के संयुक्त आह्वान पर जुटे हजारों जेबीटी और प्राथमिक शिक्षकों ने चौड़ा मैदान स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 6 घंटे का मौन उपवास रखा। शिक्षकों का सबसे कड़ा आक्रोश प्रदेश सरकार द्वारा थोपी जा रही नई ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली’ (School Complex System) और वर्षों से लंबित 25 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी को लेकर फूटा।
रिज पर माल्यार्पण से शुरुआत, अंबेडकर चौक पर मूक प्रतिरोध
सत्याग्रह की शुरुआत सुबह ऐतिहासिक रिज मैदान पर हुई। फेडरेशन के शीर्ष नेतृत्व और शिक्षकों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर विधिवत माल्यार्पण कर बापू के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इसके उपरांत सभी शिक्षक अनुशासित ढंग से चौड़ा मैदान पहुंचे। सुबह ठीक 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक शिक्षकों ने बिना किसी नारेबाजी के, पूरी तरह मौन रहकर अन्न-जल त्यागा और सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध दर्ज कराया।

अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परं तपः।
अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥
(अर्थात: अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है, अहिंसा ही सबसे बड़ा तप है, और अहिंसा ही परम सत्य है जिससे धर्म की प्रतिष्ठा होती है।)
स्कूल कॉम्प्लेक्स सिस्टम (School Complex System) को तुरंत वापस ले सरकार
शाम 5:00 बजे उपवास समाप्त होने के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए हिमाचल प्रदेश प्राइमरी टीचर फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश शर्मा और महासचिव रजनीश कौशिक ने आंदोलन की मुख्य वजहों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज का यह मौन उपवास सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
प्राथमिक कैडर के वजूद पर हमला: नेताओं ने दो टूक कहा कि सरकार द्वारा लागू की जा रही ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली’ प्राथमिक शिक्षा की स्वायत्तता पर सीधा हमला है।
छोटे बच्चों की पढ़ाई पर असर: इस व्यवस्था से प्राथमिक स्कूल माध्यमिक व उच्च विद्यालयों के अधीन चले जाएंगे, जिससे न सिर्फ प्राथमिक कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमरा जाएगा, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में छोटे बच्चों की बुनियादी तालीम भी प्रभावित होगी।
एक सुर में मांग: शिक्षकों ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार इस नई स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली को तुरंत वापस (Go Back) नहीं लेती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
25 सूत्रीय मांग पत्र पर सरकार पर दबाव
नेताओं ने स्पष्ट किया कि स्कूल कॉम्प्लेक्स का विरोध करने के साथ-साथ फेडरेशन अपने 25 सूत्रीय मांग पत्र को मनवाने के लिए पूरी मजबूती से डटा है। शिक्षकों की मुख्य मांगों में:
प्राथमिक शिक्षकों के पदोन्नति कोटे को सुरक्षित रखना,
वेतन विसंगतियों को दूर कर समयबद्ध उच्च वेतनमान सुनिश्चित करना,
पारदर्शी वरिष्ठता सूची तय करना और
सेवा शर्तों में सुधार के लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण शामिल है।
फेडरेशन ने कहा कि वर्षों से उपेक्षित इन 25 सूत्रीय मांगों पर अब सिर्फ आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, सरकार को धरातल पर ठोस फैसला लेना होगा।
शीर्ष नेतृत्व की रही मजबूत मौजूदगी
इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में फेडरेशन की राज्य कार्यकारिणी सहित जिलों और खंडों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। धरने में मुख्य रूप से प्रांतीय अध्यक्ष रमेश शर्मा, महासचिव रजनीश कौशिक, वरिष्ठ पदाधिकारी प्रताप ठाकुर, जयप्रकाश शर्मा, पीटर, सुधीर सिंह ठाकुर, संदीप शर्मा और जयप्रकाश ठाकुर सहित सैकड़ों जेबीटी शिक्षक दिनभर डटे रहे।
शाम 5 बजे मोमबत्तियां थाम सीटीओ तक निकाला कैंडल मार्च
शाम ठीक 5:00 बजे उपवास पूरा होने के बाद शिक्षकों ने हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां थामकर अंबेडकर चौक से मुख्य मालरोड स्थित सीटीओ (CTO) कार्यालय तक एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। अनुशासित और मौन तरीके से निकले इस मार्च के जरिए शिक्षकों ने शासन और प्रशासन को कड़ा संदेश दिया कि यदि सरकार ने हठधर्मिता छोड़कर 25 सूत्रीय मांगों और स्कूल कॉम्प्लेक्स व्यवस्था को वापस लेने पर त्वरित निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन शिमला की सड़कों से निकलकर प्रदेश के हर प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचेगा।
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