करवा चौथ 2026 का व्रत, पौराणिक इतिहास और चांद की पूजा

​करवा चौथ 2026: जानिए क्यों मनाया जाता है यह महापर्व — महाभारत काल और वीरावती से जुड़ा पौराणिक इतिहास, देश-विदेश में शाम ढलते ही उगेगा चांद

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पंजाब दस्तक न्यूज़
​सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, चंडीगढ़ न्यूज़ रूम


​क्यों मनाया जाता है करवा चौथ? जानिए इसका पौराणिक इतिहास और महत्व
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, त्याग और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार:
​महाभारत काल की कथा: जब पांडव जंगलों में संकटों से घिरे थे और अर्जुन तपस्या करने गए थे, तब द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछा था। कृष्ण जी ने उन्हें करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने की सलाह दी थी। द्रौपदी के इस व्रत के पुण्य प्रभाव से ही पांडवों पर आया हर संकट दूर हुआ था।
​वीरावती की अमर कहानी: साहुकार की बेटी वीरावती ने अपने सात भाइयों के छल से नकली चांद देखकर व्रत खोल लिया था, जिससे उसके पति की मृत्यु हो गई थी। वीरावती के अटूट तप, त्याग और दोबारा पूरे विधि-विधान से रखे गए करवा चौथ व्रत से प्रसन्न होकर करवा माता ने उसके पति को पुनः जीवनदान दिया था।
इसी विश्वास के साथ सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।


​विदेशों में बसी भारतीय सुहागिनें भी हिंदू संस्कृति के साथ मना रहीं करवा चौथ
करवा चौथ की यह पावन परंपरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका (USA), कनाडा, ब्रिटेन (UK) और यूरोपीय देशों में बसे भारतीय मूल के लोग और हिंदू धर्म व संस्कृति को मानने वाली सुहागिनें भी सात समंदर पार पूरे श्रद्धा-भाव से यह निर्जला व्रत रख रही हैं। विदेशों में भी भारतीय परंपराओं के अनुसार ही शाम को चांद के दीदार की तैयारियां की गई हैं।


​शाम ढलते ही चमकेगा चांद, हिमाचल से पंजाब-चंडीगढ़ तक शुरू होगी पूजा
सुबह से निर्जला उपवास रख रहीं सुहागिनों का इंतजार अब शाम ढलते ही समाप्त होगा। हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, मोहाली, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पूरे भारतवर्ष में शाम को गगन में चांद उगने के साथ ही पूजा-अर्चना का मुख्य दौर शुरू होगा।


​सरहद पर तैनात फौजी जवानों संग वीडियो कॉल से होगा पावन दीदार
देश की सुरक्षा में सीमाओं और बॉर्डर पर तैनात वीर जवानों की पत्नियां आज शाम आधुनिक तकनीक के जरिए वीडियो कॉल व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अपने पतियों का चेहरा देखेंगी। मोबाइल पर ही पति का दीदार कर और चांद को अर्घ्य देकर सुहागिनें अपना उपवास पूरा करेंगी।


​सुक्खू सरकार का फैसला और शाम को छलनी की रस्म
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा महिला और पुरुष कर्मचारियों (पतियों) दोनों के लिए सरकारी छुट्टी घोषित करने से आज पति-पत्नी बिना दफ्तर की भागदौड़ के शाम को एक साथ पूजा करेंगे। सूरज ढलने के बाद महिलाएं कथा सुनेंगी और रात को चांद निकलने पर छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा को अर्घ्य देंगी, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण करेंगी।


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