पंजाब दस्तक
भेषज, वरिष्ठ पत्रकार
कांगड़ा।
विधानसभा क्षेत्र में खिलाड़ियों को वित्तीय प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा को लेकर राजनीतिक टकराव और जन-आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। विधायक पवन काजल द्वारा भारत की टीम में जगह बनाने वाले स्थानीय खिलाड़ियों को निजी तौर पर 1-1 लाख रुपये देने के दावे पर विपक्ष और खेल संगठनों ने पूरी तरह मोर्चा खोल दिया था, लेकिन अब इस मामले में खुद विधायक ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए नया मोड़ ला दिया है। इसके बाद अब कांगड़ा में दावों और प्रतिदावों को लेकर सीधे टकराव की स्थिति बन गई है।
कुंभकरणी नींद से जागे विधायक, साढे तीन साल से धूल फांक रहे खिलाड़ियों के दस्तावेज: राजेश चौधरी
इससे पहले, पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष राजेश परियाल चौधरी ने विधायक की इस घोषणा पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि वे पिछले 15 वर्षों से हर क्षेत्र में सिर्फ राजनीति करते आ रहे हैं और अब अपनी राजनीतिक जमीन चमकाने के लिए इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे हैं।
राजेश चौधरी ने बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया था:
”जिला ओलंपिक संघ ने करीब 57 ऐसे उत्कृष्ट खिलाड़ियों के दस्तावेज (डॉक्यूमेंट्स), जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है, पिछले साढे तीन वर्षों से विधायक कार्यालय में जमा करवा रखे हैं। लेकिन आज तक उन्होंने अपनी निजी धनराशि से इन बच्चों को एक पैसा भी इनाम स्वरूप नहीं दिया। अब अचानक वे दोबारा वही पुरानी घोषणा दोहरा रहे हैं, जो साढे तीन साल पहले की गई थी। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।”
मीडिया के सामने विधायक पवन काजल का पलटवार: “कार्यालय में कोई आवेदन लंबित नहीं, विरोधियों के दावे झूठे”
इस पूरे विवाद और तीखे हमलों पर जब मीडिया ने विधायक पवन काजल से बात की, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्थिति स्पष्ट की।
विधायक पवन काजल ने मीडिया को बताया:
”हमने यह ₹1-1 लाख की घोषणा सिर्फ और सिर्फ उन गरीब और होनहार बच्चों के लिए की है जो सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। जहाँ तक हमारे कार्यालय में दस्तावेज धूल फांकने का आरोप है, तो मैं साफ कर दूं कि वर्तमान में हमारे कार्यालय में किसी भी खिलाड़ी का कोई भी आवेदन लंबित नहीं आया है। पूर्व में जो भी जेन्युइन आवेदन हमारे पास आए थे, उन्हें समय रहते पूरा कर दिया गया है और सहायता राशि दी जा चुकी है।”
जनवरी 2023 की घोषणा पर भी उठे थे सवाल: मुनीश शर्मा
गौरतलब है कि खेल जगत से जुड़े पदाधिकारियों ने भी पहले विधायक के दावों पर सवाल उठाए थे। ओलंपिक संघ के सदस्य एवं वॉलीबॉल संघ के महासचिव मुनीश शर्मा ने कहा था कि विधायक ने खिलाड़ियों को राशि देने की ऐसी ही घोषणा पहले जनवरी 2023 में की थी, लेकिन संघ के साथ पंजीकृत खिलाड़ियों के दस्तावेजों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
आमने-सामने दोनों पक्ष: कौन सच्चा, कौन झूठा?
विधायक के मीडिया में आए इस नए बयान के बाद अब कांगड़ा की खेल राजनीति में पूरी तरह टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ खेल संघ और पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष 57 खिलाड़ियों के दस्तावेज साढे तीन साल से दबाकर रखने का सीधा आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ विधायक इसे केवल सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए तय योजना बताकर और किसी भी तरह का आवेदन कार्यालय में पेंडिंग न होने की बात कहकर विरोधियों को झूठा करार दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस राजनीतिक दंगल में कौन सा पक्ष तथ्यों के साथ अपनी बात साबित कर पाता है, क्योंकि कांगड़ा की जनता इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है।
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