शिमला/धर्मशाला (वरिष्ठ पत्रकार काजल):
पूरे हिमाचल प्रदेश में जहाँ आज दिवाली का त्यौहार हर्षोल्लास और दीयों की रोशनी के साथ मनाया जा रहा है, वहीं शिमला में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा (डायरेक्टर एजुकेशन) के कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ का क्रमिक अनशन आज दिवाली के दिन भी लगातार जारी है। पिछले 105 दिनों से अनशन पर बैठे शिक्षक आज त्यौहार के दिन भी अनशन स्थल पर ही डटे हुए हैं।
बीती 23 अक्टूबर को निदेशक स्कूल शिक्षा के साथ संघ की बैठक हुई थी, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बन पाई। वार्ता विफल होने के बाद शिक्षक संघ ने आंदोलन को और तेज़ करने का निर्णय लिया है।
तपोवन में विधानसभा सत्र से ठीक एक दिन पहले बड़ा प्रदर्शन
शिक्षकों ने आंदोलन के अगले चरण के लिए 15 नवंबर का दिन चुना है। 16 नवंबर से धर्मशाला के तपोवन में विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले यानी 15 नवंबर को धर्मशाला में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए चुना रविवार का दिन
प्रदर्शन के लिए रविवार (15 नवंबर) का दिन चुनने की मुख्य वजह यह है कि दिसंबर माह में शीतकालीन स्कूलों की वार्षिक परीक्षाएं आयोजित होनी हैं। संघ का कहना है कि आंदोलन के बावजूद शिक्षण कार्य बाधित नहीं होगा और बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। शिक्षक संघ का मांगे पूरी होने तक गांधीवादी तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
धर्मशाला में दिखेगी 30,000 लोगों की महाशक्ति
15 नवंबर को धर्मशाला में होने वाले इस विशाल प्रदर्शन में प्रदेश भर से करीब 30,000 लोगों के जुड़ने का दावा किया गया है। 105 दिनों से डायरेक्टर एजुकेशन कार्यालय के बाहर चल रहे इस अनशन के बाद अब तपोवन सत्र से ठीक पहले धर्मशाला में होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के सामने बड़ा शक्ति प्रदर्शन होगा।
सरकार और व्यवस्था से पंजाब दस्तक के तीखे सवाल:
1. क्या दिवाली जैसे पावन त्यौहार पर भी 105 दिनों से अनशन पर बैठे शिक्षकों की सुध लेना सरकार का फर्ज नहीं बनता?
2. 23 अक्टूबर की बैठक बेनतीजा क्यों रही, और सरकार इन शिक्षकों की मांगों पर कोई ठोस रास्ता क्यों नहीं निकाल पा रही है?
3. क्या तपोवन में 30 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों के धर्मशाला पहुँचने के बाद ही शासन जागेगा?
4. जब शिक्षक बच्चों की पढ़ाई और वार्षिक परीक्षाओं की चिंता करते हुए रविवार का दिन चुन रहे हैं, तो सरकार उनकी इस संवेदनशीलता का सम्मान कब करेगी?
पंजाब दस्तक का विशेष दृष्टिकोण (Editor’s View):
”संघर्ष किसी का भी हो—आज जब व्यवस्था परिवर्तन और अपने अधिकारों के लिए सरकारें खुद दिल्ली जाकर धरना-प्रदर्शन कर रही हैं और लड़ाई लड़ रही हैं, तो अपने हक के लिए आवाज़ उठाना किसी भी वर्ग का अधिकार बन जाता है। लेकिन दिवाली के पावन दिन भी शिक्षकों का भूख हड़ताल पर रहना सोचने पर मजबूर करता है। जब शिक्षक बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर रविवार को प्रदर्शन कर रहे हैं, तो सरकार को भी बड़ा दिल दिखाते हुए तपोवन सत्र से पहले संवाद कायम कर इस संघर्ष का सम्मानजनक समाधान निकालना चाहिए।”
आपकी क्या राय है?
क्या सरकार को 15 नवंबर के प्रदर्शन से पहले शिक्षकों से बातचीत कर मामला सुलझाना चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें!
पंजाब दस्तक (Punjab Dastak)
हिमाचल प्रदेश की हर खबर, निष्पक्ष और सबसे सटीक रूप से पाने के लिए आपके अपने चैनल पंजाब दस्तक को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करें। हमें फॉलो करना न भूलें!
