हिमाचल में ड्रेस कोड की अनदेखी, सरकारी दफ्तरों में नियमों का मखौल

सचिवालय से लेकर जिलों तक ड्रेस कोड का खुला मखौल: भत्ते पूरे, पर वर्दी और अनुशासन से परहेज; कार्मिक विभाग के आदेशों पर पंजाब दस्तक का बड़ा खुलासा

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​शिमला / विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:
ब्यूरो रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक


​हिमाचल प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ और प्रशासनिक अनुशासन के दावों की हवा खुद सरकारी दफ्तर ही निकाल रहे हैं। कार्मिक विभाग (Personnel Department) द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जारी ड्रेस कोड की सख्त अधिसूचनाएं आज सचिवालय, विधानसभा, विश्वविद्यालयों और जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालयों में केवल फाइलों की शोभा बनकर रह गई हैं। हाल ही में कार्मिक विभाग द्वारा ड्रेस कोड को लेकर जो रिमाइंडर (याद-पत्र) जारी किया गया है, उसकी सार्थकता तभी है जब वह धरातल पर सख्ती से लागू हो।

यदि इस रिमाइंडर की भी पालना नहीं करवाई गई, तो यह सरकारी व्यवस्था के लिए एक मजाक और मखौल बनकर रह जाएगा। एक तरफ जहां कॉर्पोरेट सेक्टर में आई-कार्ड और औपचारिक परिधान से बेहतरीन कार्यसंस्कृति बनती है, वहीं सरकारी कार्यालयों में क्लास-1, क्लास-2 अधिकारियों से लेकर क्लास-3 कर्मचारियों तक जींस-टीशर्ट और अनौपचारिक कपड़ों में पहुंचकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।


​चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मनमानी: भत्ता जेब में, वर्दी पहनने से परहेज
सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वर्दी के लिए बाकायदा बजट और भत्ता उपलब्ध कराती है, इसके बावजूद वे वर्दी पहनने से पूरी तरह परहेज करते हैं। प्रशासनिक लापरवाही और ढिलाई का आलम यह है कि कई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी तय जिम्मेदारियों को छोड़कर लिपिकों (क्लर्क) की कुर्सियों और कंप्यूटरों पर जमे रहते हैं। चतुर्थ श्रेणी कहलाने में संकोच और हिचक के चलते वे किसी भी रूप में वर्दी नहीं डालते, जिससे आम जनता और आगंतुकों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन अधिकारी है, कौन क्लर्क और कौन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी।


​सख्ती के लिए जरूरी कदम:
​बायोमैट्रिक गेट पर सीधी चेकिंग: सचिवालय और डीसी दफ्तरों के मुख्य प्रवेश द्वारों पर जहां बायोमैट्रिक मशीनें लगी हैं, वहीं प्रोटोकॉल व सुरक्षा कर्मियों द्वारा ड्रेस कोड की सख्त जांच हो। अनौपचारिक कपड़ों या बिना वर्दी आने वालों की एंट्री रजिस्टर में दर्ज कर तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए।


​रिमाइंडर का सख्ती से पालन: कार्मिक विभाग के रिमाइंडर आदेशों को औपचारिकता न बनने दिया जाए; शासन के शीर्ष यानी प्रदेश सचिवालय से ही कड़ा संदेश दिया जाए, ताकि पूरे प्रदेश के अन्य कार्यालयों में अनुशासन का कड़ाई से पालन हो सके।
​जवाबदेही और कार्रवाई: सरकारी अधिसूचनाओं का उपहास उड़ाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर नियमानुसार सीधी विभागीय कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान अमल में लाया जाए।


​10 दिन बाद फिर होगी जमीनी समीक्षा
पंजाब दस्तक का ध्येय किसी को आहत करना नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और अनुशासन की गरिमा को बहाल कराना है। ठीक 10 दिन बाद इस व्यवस्था पर दोबारा विस्तृत ग्राउंड रिपोर्टिंग की जाएगी, जिसमें शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और वरिष्ठ नेतृत्व से बातचीत के साथ धरातल की पूरी स्थिति जनता के सामने रखी जाएगी।
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