हिमाचल प्रदेश में ₹13,500 करोड़ की देनदारी, DA एरियर और वित्तीय संकट

खजाने पर ₹13,500 करोड़ का बोझ, RDG बंद होने से संकट: क्या VIP कल्चर और अफसरों की गाड़ियों पर लगाम लगाकर DA-एरियर देगी सरकार?

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​विशेष आर्थिक विश्लेषण: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ (पंजाब दस्तक)
​न्यूज़ रूम, पंजाब दस्तक:


15 अगस्त के राज्यस्तरीय समारोह से पहले हिमाचल प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को उम्मीद थी कि सरकार 3% लंबित महंगाई भत्ते (DA) और बकाए एरियर पर कोई ठोस घोषणा करेगी। लेकिन मुख्यमंत्री के संबोधन में वित्तीय तंगी के चलते कोई घोषणा न होने के बाद अब कर्मचारी संगठनों में तीखी बहस छिड़ गई है।
​16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने की तलवार और कर्ज के बढ़ते पहाड़ के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार इस वित्तीय चक्रव्यूह से कैसे निकलेगी?


​खजाने पर देनदारियों का वास्तविक गणित
​वेतन आयोग का बकाया एरियर: संशोधित वेतनमान का लगभग ₹8,500 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों का लंबित है।
​लंबित DA/DR की किस्तें: महंगाई भत्ते और राहत का बकाया लगभग ₹5,000 करोड़ के पार पहुंच चुका है।
​कर्मचारी एक्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसलों के बाद सिनियोरिटी और सेवा लाभों का अतिरिक्त वित्तीय भार भी सरकार के सिर पर आ गया है।


​बजट का असंतुलन: राज्य के हर ₹100 के बजट में से ₹76 केवल वेतन (₹25), पेंशन (₹20), ब्याज (₹12) और ऋण अदायगी (₹10) में जा रहे हैं। विकास कार्यों के लिए केवल ₹24 ही बचते हैं।
​पंजाब दस्तक विश्लेषण: प्रशासनिक फिजूलखर्ची, VIP कल्चर और गाड़ियों की भरमार पर रोक कब?
​वित्तीय संकट से निपटने के लिए केवल कर्मचारियों के भत्तों को रोकना समाधान नहीं हो सकता। सरकार को प्रशासनिक फिजूलखर्ची पर फौरन कड़े कदम उठाने की जरूरत है:


​सचिवालय में सचिवों और अफसरों के पास गाड़ियों की भरमार: सचिवालय में एक-एक प्रशासनिक सचिव के पास कई-कई विभागों का प्रभार है। वे हर संबंधित विभाग से अलग-अलग गाड़ियां मंगवा लेते हैं, जिसके चलते कई अफसरों के पास 3 से 4 सरकारी गाड़ियां अटैच हैं। ये गाड़ियां गैर-जरूरी प्रोटोकॉल और इधर-उधर की आवाजाही में लगी रहती हैं, जिससे ईंधन और मेंटेनेंस पर करोड़ों का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। इस व्यवस्था पर तुरंत रोक लगाकर प्रति अधिकारी केवल एक ही गाड़ी का सख्त नियम तय होना चाहिए।


​सप्ताह में 1 दिन सरकारी गाड़ियों पर पूर्ण प्रतिबंध: सरकार को सप्ताह में कम से कम एक दिन (शनिवार या सोमवार) सभी सरकारी गाड़ियों के संचालन पर रोक लगानी चाहिए। केवल इस एक फैसले से ईंधन और गाड़ियों के रखरखाव में करोड़ों रुपये की सीधी बचत होगी।
​मंत्रियों के भारी-भरकम प्रोटोकॉल पर रोक: मंत्रियों के साथ पायलट, एस्कॉर्ट और 3-4 गाड़ियों का फ्लीट कल्चर तुरंत बंद होना चाहिए। जब प्रदेश का खजाना भारी घाटे में है, तब वीआईपी तामझाम पर जनता के पैसे की बर्बादी किसी भी सूरत में जायज नहीं है।


​सरकार के सामने आगे की राह
​RDG बंद होने और लगभग ₹6,050 करोड़ के राजस्व घाटे के बीच सरकार को अनुपयोगी संस्थानों के युक्तिकरण, बिजली-पानी सब्सिडी की समीक्षा और वीआईपी खर्चों में कटौती जैसे कड़े फैसले तुरंत लेने होंगे। लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की देनदारियों का चरणबद्ध समाधान तभी संभव है जब शासन स्तर पर कड़ा वित्तीय अनुशासन लागू किया जाए।


​अपनी राय जरूर दें:
प्रदेश के सभी कर्मचारियों, पेंशनरों और प्रबुद्ध नागरिकों से हाथ जोड़कर अपील है कि वे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने, फिजूलखर्ची रोकने और कर्मचारियों को उनका हक (DA व एरियर) दिलाने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? आपके बहुमूल्य सुझावों और कमेंट्स को पंजाब दस्तक सीधे सरकार और प्रशासनिक स्तर (सेक्रेटरी लेवल) तक मजबूती से पहुंचाएगा।


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