वरिष्ठ पत्रकार: उमांशी राणा
जिला हमीरपुर के नगर निकाय चुनावों की मतगणना पूरी होते ही राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिला की सबसे हॉट सीट मानी जा रही नगर पंचायत भोटा में बड़ा उलटफेर हुआ है। इस बार अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के कारण मुकाबला बेहद कड़ा था, जिसमें ‘साझा मोर्चा’ ने बाजी मारकर सत्ता की साख अपने हाथ में ले ली है, जबकि निवर्तमान मुखिया सनी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस नतीजे के बाद हमीरपुर की स्थानीय राजनीति में भारी उबाल आ गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अंदरूनी गुटबाजी और जोड़-तोड़ के गणित को टटोलने में जुट गई हैं।
”सरकार की गलत नीतियों को जनता ने नकारा”: हमीरपुर के नतीजों पर विपक्ष का तीखा हमला
हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनाव के नतीजे सामने आते ही विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने हमीरपुर सहित पूरे प्रदेश के नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के अपने जिला में जनता ने सरकार के मिसगवर्नेंस, झूठे वादों और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को पूरी तरह नकार दिया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी हार से डरी हुई थी, इसीलिए लंबे समय तक स्थानीय चुनाव टाले जाते रहे। राजनेताओं ने साफ कहा है कि प्रशासनिक नाकामियों के कारण ग्रामीण और शहरी जनता अब पूरी तरह से सत्ताधारी दल के खिलाफ मन बना चुकी है।
सेना भर्ती का इंतजार कर रहे हमीरपुर के ग्रामीण युवाओं की बढ़ी धड़कनें; 1 जून से शुरू होगी परीक्षा, तैयारी अधूरी
थल सेना भर्ती कार्यालय हमीरपुर के अनुसार, जिला के युवाओं के लिए आगामी 1 से 15 जून तक सेना भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों के युवाओं में देश सेवा का जबरदस्त जज्बा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर उचित ट्रेनिंग ग्राउंड और प्रशासनिक सुविधाओं की कमी को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। स्थानीय अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रशासन खेलों और युवाओं के रोजगार को लेकर केवल बड़े-बड़ी घोषणाएं करता है, लेकिन भर्ती के ऐन वक्त पर ग्रामीण युवाओं को प्रैक्टिस के लिए खुद के भरोसे छोड़ दिया गया है।
बालयोगी के दरबार में उमड़ा 25 हजार श्रद्धालुओं का सैलाब, ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त होने से ग्रामीण और राहगीर परेशान
जिला के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर बालयोगी के दरबार में पिछले 12 घंटों के भीतर करीब 25 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। इतनी भारी तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण ग्रामीण इलाकों में रौनक तो लौट आई है, जिससे स्थानीय छोटे दुकानदारों की आर्थिकी को बल मिला है, लेकिन दूसरी तरफ प्रशासनिक ढील के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई। मुख्य ग्रामीण मार्गों पर मीलों लंबा जाम लगने से स्थानीय ग्रामीणों, दूध-सब्जी विक्रेताओं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन को ऐसे बड़े आयोजनों पर पहले से रूट डायवर्जन और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी चाहिए।

भर्ती परीक्षाओं के लटके परिणामों पर बेरोजगार युवाओं का सब्र टूटा, राज्य चयन आयोग के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी
हमीरपुर स्थित राज्य चयन आयोग द्वारा सांख्यिकी सहायक जैसी छोटी भर्तियों के परिणाम जारी करने के बाद भी, कई बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक परीक्षाओं के अंतिम परिणाम महीनों से लटके हुए हैं। आज सुबह जिला के दर्जनों बेरोजगार युवाओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि तंत्र केवल पारदर्शिता का ढोंग कर रहा है, जबकि धरातल पर महीनों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवा नौकरियों के इंतजार में ओवरएज हो रहे हैं। यदि अगले कुछ दिनों में बाकी लटके हुए परिणाम घोषित नहीं किए गए, तो हमीरपुर मुख्य कार्यालय के बाहर उग्र धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
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