गगरेट। गगरेट नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव नतीजों ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है। कुल 7 पार्षदों वाली इस नगर पंचायत में भाजपा समर्थित 6 पार्षद होने के बावजूद अध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की झोली में चली गई। इस अप्रत्याशित हार के बाद गगरेट भाजपा में जहां पूरी तरह से कोहराम मचा हुआ है, वहीं कांग्रेस खेमे में भारी जश्न का माहौल है।
इस करारी हार ने भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी को पूरी तरह चौराहे पर ला खड़ा किया है। निष्ठावान कार्यकर्ताओं और जनता के बीच अब एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर 6 पार्षद होने के बावजूद यह ऐतिहासिक चूक कैसे हुई और क्या अनुशासन की धज्जियां उड़ाने वाले इन भीतरघातियों पर सख्त एक्शन नहीं होना चाहिए?
6 बनाम 1 का गणित, फिर भी कांग्रेस की लगी लॉटरी
गगरेट नगर पंचायत में संख्या बल पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में था। 7 में से 6 पार्षद भाजपा समर्थित थे और कांग्रेस के पास केवल 1 पार्षद था। लेकिन जब वोटिंग के नतीजे सामने आए, तो भाजपा खेमे के पैरों तले जमीन खिसक गई। भाजपा समर्थित पार्षदों ने अंदरूनी गुटबाजी के चलते क्रॉस वोटिंग कर डाली, जिससे 6 पार्षदों वाली भाजपा एकतरफा मुकाबला हार गई और महज 1 पार्षद वाली कांग्रेस अध्यक्ष का पद ले उड़ी। इसे भाजपा के लिए “440 वोल्ट का झटका” माना जा रहा है, जिसने पार्टी के तथाकथित अनुशासन की सरेआम धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।
चैतन्य शर्मा ने अपनी ही पार्टी के ‘अन्य नेता’ पर निकाली भड़ास
इस शर्मनाक हार के बाद पूर्व विधायक और भाजपा नेता चैतन्य शर्मा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मीडिया के सामने बिना नाम लिए अपनी ही पार्टी के एक अन्य नेता पर जमकर भड़ास निकाली और तीखा हमला बोला। चैतन्य शर्मा ने साफ लफ्जों में कहा कि अंदरूनी राजनीति और निजी स्वार्थ के चलते पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा गया है। इस बयान के बाद गगरेट से लेकर शिमला तक भाजपा के भीतर की गुटबाजी और टिकट की अंधी दौड़ खुलकर सामने आ गई है।
विधायक राकेश कालिया गदगद, गगरेट बीजेपी में कोहराम
दूसरी तरफ, इस चमत्कारिक और अप्रत्याशित जीत से कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह है। स्थानीय कांग्रेस विधायक राकेश कालिया इस जीत से पूरी तरह गदगद हैं और इसे भाजपा की अंदरूनी नीतियों के खिलाफ पार्षदों का जनादेश बता रहे हैं।
उधर, इस भीतरघात से गगरेट भाजपा में पूरी तरह कोहराम मचा हुआ है। कार्यकर्ताओं का साफ मानना है कि चाहे नूरपुर हो, बड़सर हो, चंबा हो या पालमपुर—हर जगह नेता केवल एक-दूसरे को नीचा दिखाने और टिकट की होड़ में सीटें गंवाने में लगे हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा हाईकमांड इस बड़ी अनुशासनहीनता के जिम्मेदार चेहरों पर क्या सख्त एक्शन लेती है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
पंजाब दस्तक के लिए वरिष्ठ पत्रकार काजल की विशेष रिपोर्ट
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