शिमला (पंजाब दस्तक/मीनाक्षी)।
हिमाचल प्रदेश में स्कूल कॉम्प्लेक्स व्यवस्था को लेकर उपजा प्रशासनिक विवाद अब एक अत्यंत नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में बदलाव की नीति के खिलाफ पिछले कई दिनों से लगातार हुंकार भर रहे प्राथमिक शिक्षक महासंघ के तेवरों को देखते हुए शिक्षा महकमे ने प्रशासनिक चाबुक चला दिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने लगातार जारी इस विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे शिक्षक संघ के शीर्ष पदाधिकारियों पर शिकंजा कसते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
लंबे खिंचते आंदोलन से बच्चों की पढ़ाई पर गहराया संकट!
इस पूरे प्रशासनिक टकराव के बीच सबसे अहम और संवेदनशील पहलू प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के मासूम बच्चों की शिक्षा व्यवस्था का है। यह आंदोलन पिछले कई दिनों से लगातार चलाया जा रहा है और विभागीय पड़ताल के अनुसार, शिमला स्थित मुख्यालय के बाहर जारी इस धरने में रोजाना 5 से 10 शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। शैक्षणिक सत्र और परीक्षाओं के महत्वपूर्ण दौर में शिक्षकों के कक्षाओं से दूर रहकर आंदोलन की राह चुनने के कारण कई सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पठन-पाठन की प्रक्रिया बुरी तरह चरमरा गई है।
अवकाश प्रावधानों के दुरुपयोग पर प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी
शिक्षा निदेशालय द्वारा थमाए गए नोटिस में विभागीय नियमों की अवहेलना को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई है। अधिकारियों का सीधा आरोप है कि आंदोलनकारी शिक्षक अपनी मांगों की पूर्ति और सरकारी फैसलों के विरोध के लिए नियमित अवकाश (लीव रूल्स) के नियमों का अनुचित इस्तेमाल कर रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सिविल सेवा आचरण नियमावली के विपरीत जाकर प्रशासनिक नीतियों की खुलेआम आलोचना करना और छुट्टियों की आड़ में आंदोलन चलाना नियमों का सीधा उल्लंघन है, जिस पर आगे कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है।
गतिरोध और समाधान का अनसुलझा गणित
एक तरफ प्राथमिक शिक्षक महासंघ का दावा है कि स्कूल कॉम्प्लेक्स व्यवस्था प्राथमिक शिक्षा के व्यावहारिक स्वरूप और शिक्षकों के प्रशासनिक अधिकारों को प्रभावित करेगी, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग इस व्यवस्था को पठन-पाठन का स्तर सुधारने और संसाधनों के सही आवंटन का जरिया बता रहा है। कई दिनों से चल रहे इस लंबे गतिरोध के बाद अब विभाग के इस कड़े रुख ने शिक्षक संघ की अगली रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंजाब दस्तक के तीखे सवाल:
पहला सवाल: कई दिनों से जारी इस तनातनी के बीच प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई के नुकसान का जिम्मेदार कौन है?
दूसरा सवाल: क्या शिक्षा विभाग का यह कारण बताओ नोटिस आंदोलन को समाप्त कराने का प्रशासनिक दबाव है या शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश?
तीसरा सवाल: क्या सरकार और प्राथमिक शिक्षक महासंघ के बीच संवाद का रास्ता निकलेगा या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा?
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