बिकने के आरोप पर मुख्यमंत्री खुद घिरे: पुलिस जांच में एक रुपया भी अवैध नहीं मिला; 47,000 करोड़ का नया कर्ज और 28 लाख महिलाओं से वादाखिलाफी पर राजेंद्र राणा का तीखा प्रहार; कहा—”सरकार की उल्टी गिनती शुरू”

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​सुजानपुर (गौरव, पंजाब दस्तक)।
​हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब अपने चरम पर पहुंच गया है। सुजानपुर के पूर्व विधायक एवं प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने ‘पंजाब दस्तक’ के साथ विशेष बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा सियासी हमला बोला है। राजेंद्र राणा ने कहा कि बिकने के मनगढ़ंत आरोपों पर अब मुख्यमंत्री खुद ही पूरी तरह से घिर चुके हैं और वर्तमान सरकार की उल्टी गिनती उल्टे गियर में शुरू हो चुकी है।


​1. बिकने के आरोप पर मुख्यमंत्री खुद घिरे: पुलिस जांच में एक रुपया भी अवैध नहीं मिला
​पंजाब दस्तक से बातचीत के दौरान राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पिछले ढाई साल से हर मंच पर नौ विधायकों के बिकने का झूठा राग अलाप रहे हैं।
​जांच में क्लीन चिट: राणा ने खुलासा किया कि पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों ने पूरी गहनता से जांच की, विधायकों की कॉल डिटेल खंगाली गई और उनके बैंक खातों की पाई-पाई जांची गई। जांच पूरी होने के बाद एक रुपया भी अवैध नहीं पाया गया।
​सबूत दें या सार्वजनिक माफी मांगें: “जब पुलिस जांच में ही कुछ नहीं मिला, तो मुख्यमंत्री लगातार झूठ बोलकर जनता को गुमराह क्यों कर रहे हैं? या तो मुख्यमंत्री अपने आरोपों का पुख्ता सबूत जनता के सामने लाएं या फिर सार्वजनिक रूप से प्रदेश की जनता से माफी मांगें। जो नेता हर मंच से मनगढ़ंत झूठ बोले, वह मुख्यमंत्री कहलाने के लायक ही नहीं है।”


​2. देहरा में 60 महिला मंडलों को 50-50 हजार रुपये बांटने का गंभीर आरोप
​देहरा विधानसभा उपचुनाव के दौरान सरकारी खजाने और प्रशासनिक तंत्र के बेजा इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा किया:
​असंवैधानिक फंडिंग: राणा ने आरोप लगाया कि चुनाव आचार संहिता के दौरान असंवैधानिक और गैर-कानूनी तरीके से देहरा के 60 महिला मंडलों के खातों में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक (KCCB) के जरिए 50-50 हजार रुपये डाले गए।
​निजी स्वार्थ में सरकारी खजाना लुटाया: “हिमाचल के इतिहास में सत्ता का ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं देखा गया। सरकार जनता के टैक्स के पैसे की कस्टोडियन (संरक्षक) होती है, उसकी मालिक नहीं। अगर मुख्यमंत्री को वास्तव में महिला सशक्तिकरण की चिंता होती, तो वे केवल अपनी पत्नी को चुनाव जिताने के लिए देहरा में पैसों की बंदरबांट करने के बजाय प्रदेश की सभी महिला मंडलों को 50-50 हजार रुपये जारी करते।”


​3. ‘कुर्बानी का भाषण और मुआवजे का ट्रांजैक्शन ही सुक्खू मॉडल’; श्वेत पत्र लाने की मांग
​जनता असली त्यागी: राजेंद्र राणा ने कहा कि सच यह है कि हिमाचल की आम जनता सड़कों और विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीनें बिना मुआवजे के दान देकर असली दानवीर बन रही है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अपनी जमीन का मुआवजा अपने बैंक खाते में लेकर खुद को त्यागी बता रहे हैं। इसे त्याग नहीं, सौदागरी कहा जाता है।
​श्वेत पत्र की चुनौती: “मंच पर कुर्बानी का भाषण देना और बैंक में मुआवजे का ट्रांजैक्शन करवाना ही असली ‘सुक्खू मॉडल’ है। अगर मुख्यमंत्री अपने स्थान पर सही हैं, तो सरकार तुरंत श्वेत पत्र लाए और बताए कि प्रदेश में जमीन दान करने वाले कितने आम लोगों को सरकार ने मुआवजा दिया है।”


​4. चंबा में 15,000 महिलाओं को छलावा; पूछा—”क्या बाकी 28 लाख महिलाएं हिमाचल की नहीं?”
​महिलाओं से वादाखिलाफी: चंबा में 15,000 महिलाओं को 1,500 रुपये की घोषणा पर चुटकी लेते हुए राजेंद्र राणा ने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि जब चुनाव के समय प्रदेश की हर पात्र महिला को 1,500 रुपये देने की गारंटी दी गई थी, तो अब बाकी 28 लाख महिलाओं के साथ यह अन्याय क्यों? क्या वे 28 लाख महिलाएं हिमाचल की नागरिक नहीं हैं? सरकार लगातार अपनी गारंटियों से मुकर कर प्रदेश की महिलाओं को ठग रही है।
​47,000 करोड़ का नया कर्ज और लूट का आरोप: राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश पर 47,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नया कर्ज चढ़ चुका है। सरकार केवल कर्ज लेकर फिजूलखर्ची कर रही है और प्रदेश को लूटने का काम धड़ल्ले से जारी है।


​पंजाब दस्तक का बेबाक विश्लेषण
​प्रदेश भाजपा प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा के इस धमाकेदार इंटरव्यू ने शिमला से लेकर हमीरपुर तक की सियासत में खलबली मचा दी है। पुलिस जांच में वित्तीय गड़बड़ी न मिलने की बात, देहरा में महिला मंडलों को फंड ट्रांसफर, 47 हजार करोड़ के नए कर्ज का हिसाब, 28 लाख महिलाओं से वादाखिलाफी और श्वेत पत्र लाने की मांग के जरिए राणा ने सुक्खू सरकार के खिलाफ एक पूरी चार्जशीट पेश कर दी है। अब देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष इन तीखे सवालों का क्या जवाब देता है।


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