हिमाचल प्रदेश (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)।
देवभूमि हिमाचल प्रदेश की 75 लाख जनता और प्रदेश के स्वाभिमान के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज हो गया है। भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड (BBMB) में हिमाचल के कानूनी हिस्से और बकाए एरियर (Arrears) की 6 दशकों से चली आ रही कानूनी व राजनीतिक लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से जहां प्रदेश के सरकारी खजाने में हर साल ₹500 करोड़ से लेकर ₹1,000 करोड़ तक का स्थायी राजस्व जुड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, वहीं यह जीत यह भी साबित करती है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर दौर के सशक्त नेतृत्व, सभी अधिकारियों, विधिक विशेषज्ञों और राज्य के दिग्गजों की तपस्या आखिरकार रंग लाई है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला और वित्तीय गणित?
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी (BBMB) से बकाए एरियर के रूप में 55 से 56 करोड़ मिलियन यूनिट बिजली (सालाना लगभग 60 करोड़ यूनिट) का आवंटन किया जाएगा। यह बिजली आपूर्ति हिमाचल को आगामी 20 वर्षों तक लगातार प्राप्त होती रहेगी।
वित्तीय लाभ का पूरा गणित:
न्यूनतम ₹500 करोड़ सालाना का स्थायी लाभ: यदि बिजली का न्यूनतम दर मात्र ₹6 प्रति यूनिट भी तय किया जाता है, तो भी हिमाचल प्रदेश के सरकारी खजाने में हर साल कम से कम ₹500 करोड़ की सीधी वित्तीय मदद आएगी।
₹1,000 करोड़ प्रति वर्ष तक संभावित राजस्व: हिमाचल सरकार पूर्व में राजस्थान को ₹15.50/यूनिट, केरल को ₹14.50/यूनिट और तमिलनाडु को ₹13.50/यूनिट की दर से बिजली बेच चुकी है। यदि बीबीएमबी से मिलने वाली इस एरियर बिजली का भावी समझौता ₹13 से ₹14 प्रति यूनिट के आसपास बैठता है, तो हिमाचल को हर साल ₹1,000 करोड़ का भारी-भरकम राजस्व हासिल होगा।
प्रो. प्रेम कुमार धूमल: हिमाचल के हक की नींव रखने वाले जननायक
इस ऐतिहासिक फैसले के समय हिमाचल के सर्वप्रिय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल का नाम सबसे शीर्ष पर आता है। प्रदेश के अधिकारों के लिए उनके द्वारा किया गया संघर्ष आज भी हर हिमाचली के दिल में बसा है।
2011 का ऐतिहासिक मील का पत्थर: वर्ष 2011 में जब प्रो. प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने बीबीएमबी में हिमाचल के 7.19% हक और एरियर के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में पूरी ताकत से लड़ा।
दिल्ली में कड़ा संघर्ष: प्रो. धूमल ने खुद कई बार नई दिल्ली जाकर केंद्र सरकार, केंद्रीय मंत्रियों और विधि विशेषज्ञों के साथ मैराथन बैठकें कीं। 2011 में प्रो. धूमल सरकार की मजबूत पैरवी का ही नतीजा था कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार हिमाचल के 7.19% हिस्से पर संवैधानिक मुहर लगाई थी। आज जो फैसला आया है, उसकी मजबूत इमारत प्रो. धूमल जी की उसी दूरदर्शिता और राजनीतिक दृढ़ता पर टिकी है।
स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का निरंतर प्रयास और प्रशासनिक मजबूती
हिमाचल की राजनीति के शिखर पुरुष और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का योगदान भी इस कानूनी लड़ाई में अतुलनीय रहा है।
प्रो. धूमल सरकार द्वारा 2011 में हासिल की गई कानूनी जीत के बाद स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने एरियर की जटिल गणना (Calculation) की प्रक्रिया को बेहद मजबूती से आगे बढ़ाया।
वीरभद्र सिंह जी ने बीबीएमबी प्रबंधन और पड़ोसी राज्यों के साथ कई दौर की वार्ताएं कीं और दिल्ली में हिमाचल के पक्ष को कभी कमजोर नहीं होने दिया। उनके कार्यकाल में तैयार किए गए प्रशासनिक आंकड़ों ने इस केस को तार्किक मजबूती प्रदान की।
जय राम ठाकुर का केंद्रीय पैरवी में मजबूत प्रयास और निर्णायक भूमिका
पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने प्रो. धूमल जी और स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी द्वारा आगे बढ़ाई गई इस कानूनी जंग को अपनी सरकार के दौरान (2017-2022) बेहद आक्रामक और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाया:
दिल्ली के गलियारों में प्रभावी पैरवी: जय राम ठाकुर ने अपने पांच साल के कार्यकाल में बीबीएमबी एरियर के मुद्दे को कभी ठंडा नहीं पड़ने दिया। उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट की लीगल टीमों के साथ दर्जनों दौर की उच्च स्तरीय बैठकें कीं।
एरियर समायोजन पर जोर: जय राम ठाकुर ने लगातार केंद्रीय मंचों पर दबाव बनाए रखा कि 2011 के फैसले के बाद जो एरियर की गणना अटकी थी, उसे हिमाचल को बिजली या वित्तीय रूप में जल्द दिया जाए। 2011 के उस ऐतिहासिक फैसले को अंतिम पड़ाव तक लाने में जय राम ठाकुर का केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय और कड़ा संघर्ष बेहद निर्णायक साबित हुआ।
वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और भावी रोडमैप
वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सत्ता संभालने के बाद इस फैसले की पैरवी में कोई ढिलाई नहीं आने दी और इस जीत पर प्रदेश की 75 लाख जनता, लीगल टीम और सभी अधिकारियों को बधाई दी।
1,197.3 करोड़ यूनिट बिजली का एरियर: सीएम सुक्खू ने बताया कि प्रदेश का कुल मूल बकाया 1,306.6 करोड़ यूनिट बिजली का था। अब पंजाब और हरियाणा को हिमाचल के हिस्से की 44 साल की बकाया बिजली देनी होगी। केंद्र सरकार के प्रस्ताव के तहत हिमाचल को 20 साल में कुल 1,197.3 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी (हर साल लगभग 60 करोड़ यूनिट), जिससे आगामी 20 वर्षों में प्रदेश को ₹10,000 से ₹20,000 करोड़ की आय होने का अनुमान है।
शानान प्रोजेक्ट, वॉटर सेस और चंडीगढ़ के हक पर अगला लक्ष्य: मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट कहा कि “बीबीएमबी की 44 साल पुरानी लड़ाई हमने जीत ली है। अब हमारी सरकार शानान जलविद्युत परियोजना को वापस लेने, वॉटर सेस (Water Cess) को कानूनी रूप से बहाल करवाने और चंडीगढ़ में हिमाचल के वाजिब हक के लिए पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी।”
पंजाब दस्तक का बेबाक नजरिया: दलगत राजनीति से ऊपर हिमाचल के स्वाभिमान की जीत
बीबीएमबी एरियर का यह निर्णय केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश के 75 लाख नागरिकों के हक और स्वाभिमान की ऐतिहासिक महाजीत है।
प्रो. प्रेम कुमार धूमल जी की 2011 की वह ऐतिहासिक कानूनी जंग, स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का निरंतर प्रयास, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर की नई दिल्ली में की गई कडी पैरवी और वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की दृढ इच्छाशक्ति तथा सभी वकीलों व अधिकारियों का परिश्रम—आज इन सभी के मिले-जुले प्रयासों से हिमाचल को उसका असली हक मिला है।
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सुरेंद्र राणा
ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
