सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
पंजाब की राजनीति में चुनाव से ठीक पहले एक बहुत बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। सूबे की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) को अब तक का सबसे करारा और आत्मघाती झटका लगा है। आम आदमी पार्टी का कुनबा ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आ रहा है। पार्टी की नीतियों, वादाखिलाफी और राज्य में बेकाबू होते नशे के जाल से तंग आकर AAP के 3 बड़े और दिग्गज विधायकों ने पार्टी से हमेशा के लिए मुंह मोड़ लिया है।
अमृतसर उत्तरी से विधायक व पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री व समाना से विधायक चेतन सिंह जोड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय मुख्यालय पहुंच चुके हैं। केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में ये तीनों कद्दावर नेता औपचारिक तौर पर ‘कमल’ का दामन थाम रहे हैं।
सांसदों के बाद अब विधायकों की बड़ी टूट, बिखराव की ओर AAP
गौरतलब है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के लिए यह बगावत अचानक नहीं हुई है। इससे पहले राज्यसभा सांसदों द्वारा पाला बदलकर बीजेपी में शामिल होने से AAP की नींव पहले ही हिल चुकी थी। सांसदों के बाद अब तीन कद्दावर विधायकों के इस पलायन ने यह साफ कर दिया है कि आम आदमी पार्टी का राजनीतिक आधार पूरी तरह डगमगा रहा है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, यह तो सिर्फ शुरुआत है। आने वाले कुछ ही हफ्तों में कई अन्य विधायक, वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता भी AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। चुनावों में महज़ कुछ महीने बचे हैं और इस भगदड़ से पंजाब का सियासी माहौल पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में झुकता दिख रहा है।
नशे के समंदर में डूबता पंजाब और अपनों का बगावती तेवर
पंजाब में जिस ‘बदलाव’ का दावा करके आम आदमी पार्टी सत्ता में आई थी, आज वही बदलाव जनता और खुद पार्टी के विधायकों के लिए सबसे बड़ा छलावा साबित हो रहा है। राज्य में गली-गली में पसरते नशे के कारोबार, गन कल्चर और चरमराती कानून-व्यवस्था को लेकर इन विधायकों का अपनी ही सरकार से मोहभंग हो चुका था।
पूर्व आईपीएस कुंवर विजय प्रताप सिंह समेत तीनों विधायकों ने समय-समय पर अपनी ही सरकार की नाकामी और नशे के मुद्दे पर आंखें मूंदने की नीति पर गंभीर सवाल उठाए थे। जब सरकार ने राज्य को नशा मुक्त बनाने के बजाय आंखें बंद कर लीं, तब इन नेताओं ने पंजाब के उज्ज्वल भविष्य और पंजाबियों के हक के लिए AAP का साथ छोड़ना ही मुनासिब समझा।
बीजेपी का ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान और उत्तर भारत में बड़ा बदलाव
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूरे राज्य में चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठाए गए सख्त कदमों ने पंजाब की जनता के साथ-साथ दिग्गज नेताओं का भी दिल जीत लिया है।
पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पूरे उत्तर भारत के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीन कद्दावर नेताओं के बीजेपी में आने से पंजाब की सियासत की दिशा पूरी तरह बदल गई है:
मालवा और माझा में मजबूत पकड़: यह तीनों विधायक पंजाब के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाकों (लुधियाना, पटियाला, खन्ना और मालवा-माझा बेल्ट) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
विपक्षी खेमे में प्रचंड बढ़त: पिछले चुनाव में इन्हीं दिग्गजों के बलबूते AAP ने जीत हासिल की थी, लेकिन अब इनके बीजेपी में शामिल होने से बीजेपी कैडर को अभूतपूर्व ताकत और जमीनी आधार मिला है।
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