मीनाक्षी, वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक, शिमला
शिमला/पंजाब दस्तक:
राजधानी शिमला के संजौली-भट्टाकुफर क्षेत्र में एनएचएआई (NHAI) द्वारा बनाई जा रही सुरंग अब स्थानीय निवासियों की जान और मकानों के लिए सीधी आफत बन चुकी है। घनी आबादी के नीचे अवैध-असुरक्षित टनल निर्माण और पहाड़ियों के धंसने के खतरे को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई हुई।
विनीत शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं की अर्जी पर वरिष्ठ पत्रकार मीनाक्षी ने 1 अक्टूबर 2026 को मौके पर पहुंचकर खुद ग्राउंड निरीक्षण किया था।
हाई कोर्ट की बड़ी बातें और मुख्य अपडेट्स:
₹600 करोड़ बांटने के बाद अचानक क्यों बदली योजना?
अदालत ने NHAI से कड़ा जवाब मांगा है कि जब चक्कड़ाल, भट्टाकुफर और ढली मार्ग पर सरफेस हाईवे बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण हो चुका था और प्रभावितों को लगभग ₹600 करोड़ का मुआवजा बांटा जा चुका था, तो फिर मूल योजना (NH-05) को ताक पर रखकर घनी आबादी के नीचे ट्विन ट्यूब टनल बनाने की जिद क्यों की गई? अदालत ने साफ पूछा कि सरकारी खजाने के करोड़ों रुपयों के इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है?
GSI की चेतावनी दरकिनार, जमीनी सतह से महज 14 मीटर नीचे टनल:
याचिका में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुलासा किया गया कि इस क्षेत्र की नाजुक भूगर्भ स्थिति को लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद निर्माण जारी रखा गया। टनल के मुहानों से पानी का रिसाव हो रहा है और सिमेट्री तथा विशाल मेगा मार्ट के पास टनल और जमीन की सतह के बीच महज 14 मीटर का फासला बचा है, जिससे सैकड़ों मकान कभी भी जमींदोज हो सकते हैं।
18 सितंबर से काम ठप, IIT रुड़की की रिपोर्ट पर टिकी नजरें:
NHAI ने अदालत में माना कि जनता के विरोध और सुरक्षा कारणों से 18 सितंबर 2026 से टनल का निर्माण कार्य रोक दिया गया है। NHAI ने आश्वासन दिया है कि जब तक IIT रुड़की की तकनीकी रिपोर्ट नहीं आ जाती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते, तब तक काम शुरू नहीं होगा।
17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई:
NHAI के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने फिलहाल अलग से स्टे ऑर्डर जारी नहीं किया है, लेकिन साफ उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई तक मौके पर एक भी ईंट या मशीन नहीं चलेगी। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 तय की गई है।
पंजाब दस्तक कमेंट (संपादकीय टिप्पणी):
”जनता की जान से खिलवाड़ और खजाने पर डकैती बंद हो!”
पंजाब दस्तक की ओर से सवाल बड़ा और सीधा है—जब GSI पहले ही चेतावनी दे चुका था और 600 करोड़ रुपए का मुआवजा देकर पुरानी रोड मंजूर हो चुकी थी, तो घनी आबादी के नीचे केवल 14 मीटर की गहराई पर टनल खोदने की जल्दबाजी में किस अफसर या ठेकेदार का फायदा छिपा था? पहाड़ियों को कमजोर कर सैकड़ों निर्दोष परिवारों की जिंदगी को दांव पर लगाना भारी लापरवाही है। पंजाब दस्तक मांग करता है कि दोषी अधिकारियों और एजेंसियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो और जब तक लोगों के घरों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित न हो, काम को पूरी तरह रद्द किया जाए।
पंजाब दस्तक अपील:
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