सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक):
हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग में तैनात क्लास-वन श्रेणी के दर्जनों सहायक अभियंता (असिस्टेंट इंजीनियर) इन दिनों विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक लेटलतीफी का दंश झेलने को मजबूर हैं। कड़ा और चुस्त-दुरुस्त 2 साल का अनुबंध कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा कर लेने के बावजूद इन अधिकारियों के नियमितीकरण (Regularization) के आदेश जारी न होना पूरे सरकारी अमले की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। प्रदेश सरकार के तय नियमों के मुताबिक 30 सितंबर तक 2 साल का अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले पात्र अधिकारियों को 1 अक्टूबर से नियमित करने का स्पष्ट प्रावधान है, मगर जल शक्ति विभाग में यह प्रक्रिया फाइलों के जाल में उलझकर ठप पड़ी है।
विभागीय नियमावली के तहत इन क्लास-वन अधिकारियों के लिए किसी DPC की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि विभागाध्यक्ष कार्यालय (E-in-C ऑफिस) से अधिकारियों की ‘वर्क एंड कंडक्ट’ और परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार होकर सीधे प्रशासनिक सचिव (सेक्रेटरी जल शक्ति) को भेजी जाती है। इसके बाद सेक्रेटरी और माननीय मंत्री इंचार्ज की मंजूरी मिलते ही नियमितीकरण की अधिसूचना जारी हो जाती है। ऐसे में अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि यह महत्वपूर्ण फाइल आखिर किसके टेबल पर अटक कर रह गई है? क्या E-in-C कार्यालय से समय पर वर्क एंड कंडक्ट रिपोर्ट भेजने में ढिलाई बरती गई या फिर फाइल सचिवालय में सेक्रेटरी और मंत्री के दफ्तरों के चक्कर काट रही है?
2 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके पात्र सहायक अभियंताओं ने सरकार और विभागीय आलाधिकारियों से पुरजोर अपील की है कि त्योहारी सीजन को देखते हुए इस फाइल को बिना किसी देरी के तुरंत क्लीयर कर आदेश जारी किए जाएं, ताकि उन्हें आर्थिक व सेवा संबंधी नुकसान न झेलना पड़े। अब देखना यह होगा कि क्या इस दिवाली सुक्खू सरकार इन युवा क्लास-वन अधिकारियों को रेगुलराइजेशन की सौगात देती है या फिर इनका इंतजार और लंबा खिंचेगा।
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