सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक), बिलासपुर
बिलासपुर:
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS बिलासपुर) के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। संस्थान के पहले दीक्षांत समारोह में देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी और ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति ने चिकित्सा, नर्सिंग और पैरामेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को डिग्रियां और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सभी नव-दीक्षित चिकित्सकों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और मंच से सीधे डॉक्टरों के दिल को छू लेने वाली एक बड़ी अपील रखी।
डॉक्टर बनना केवल करियर नहीं, मानवता की सच्ची सेवा: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दो टूक शब्दों में कहा कि डॉक्टर बनना केवल एक बेहतर करियर या आर्थिक तरक्की का जरिया नहीं है, बल्कि यह पीड़ित मानवता की सेवा का सबसे पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि डॉक्टर कठिन और दुर्गम इलाकों में जाने से कतराते हैं, लेकिन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना ही इस पेशे का सबसे बड़ा धर्म और जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने नए डॉक्टरों से भावुक आह्वान किया कि वे अपने करियर के शुरुआती दौर में कम से कम 1 से 2 साल हिमाचल प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में जाकर निस्वार्थ भाव से सेवाएं दें।
43 MBBS डॉक्टरों समेत नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह के गौरवपूर्ण मंच से राष्ट्रपति ने संस्थान के 2020 बैच के 43 एमबीबीएस पासआउट डॉक्टरों को उपाधियां सौंपीं। इसके साथ ही 2023 बैच के 14 एमडी/एमएस विशेषज्ञ चिकित्सकों, 2022 बैच की 26 नर्सिंग प्रशिक्षुओं और 9 पैरामेडिकल विद्यार्थियों को भी डिग्रियां व पदक देकर सम्मानित किया गया।
चिकित्सा के मानवीय पक्ष की दिलाई याद
राष्ट्रपति ने डॉक्टरों को उनके पेशे की संवेदनशीलता का एहसास कराते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति बीमारी की गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचता है, तो उसके साथ-साथ उसका पूरा परिवार डर, चिंता और अनिश्चितता के साए में होता है। ऐसे नाजुक वक्त में डॉक्टर ही मरीज और परिजनों के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आता है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक का संवेदनशील और आत्मीय व्यवहार मरीज की आधी तकलीफ को खुद-ब-खुद दूर कर देता है।
पहले बैच के डॉक्टरों पर संस्थान की साख की बड़ी जिम्मेदारी
संस्थान के पहले बैच के विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पहले बैच के डॉक्टरों की भूमिका सबसे ज्यादा अहम होती है। उनका काम, आचरण और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगा। युवा डॉक्टरों की मेहनत से न केवल उनका निजी भविष्य संवरेगा, बल्कि पूरे देश में AIIMS बिलासपुर की साख, प्रतिष्ठा और पहचान भी नई बुलंदियों को छुएगी।
दुर्गम इलाकों तक पहुंचे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
हिमाचल की विषम भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण यहाँ कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भौगोलिक चुनौतियों के चलते विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने संस्थान और डॉक्टरों पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीकों और सेवा भाव के तालमेल से इन दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतरीन इलाज पहुंचाना समय की सबसे बड़ी मांग है।
3 वर्षों में 12 लाख ओपीडी और 1 लाख से अधिक इनडोर मरीजों को मिला लाभ
राष्ट्रपति ने एम्स बिलासपुर की प्रगति की सराहना करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में करीब 12 लाख बाह्य रोगी (OPD) और 1 लाख से अधिक भर्ती मरीज (IPD) संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं, जो इस संस्थान की बढ़ती उपयोगिता को साबित करता है।
आयुष्मान योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने का आग्रह
राष्ट्रपति ने गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के लिए महंगा इलाज जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है और कई बार इलाज के खर्च को पूरा करने के लिए लोगों को अपनी जमीन-जायदाद व संपत्ति तक बेचनी पड़ जाती है। ऐसे में उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों से आग्रह किया कि वे सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव और हर जरूरतमंद परिवार तक पहुंचाएं ताकि किसी गरीब को इलाज के अभाव में न भटकना पड़े।
रिसर्च से इनोवेशन और इन्वेंशन से बेहतर स्वास्थ्य का संदेश
राष्ट्रपति ने चिकित्सा विद्यार्थियों से जीवन भर सीखते रहने की अपील करते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं में हर दिन तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों के लिए सीखने की प्रक्रिया डिग्री मिलने के साथ खत्म नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी जानकारी को रिसर्च में बदलें, रिसर्च को इन्वेंशन में तब्दील करें और इन्वेंशन के जरिए आम लोगों के जीवन को बेहतर और स्वस्थ बनाने का निरंतर प्रयास करें।
राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया भव्य स्वागत
इससे पूर्व, बिलासपुर पहुंचने पर प्रदेश के राज्यपाल कवींद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सहित कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कई विधायकों ने एम्स बिलासपुर परिसर में महामहिम राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया।
दीक्षांत समारोह के बाद मनाली रवाना हुईं राष्ट्रपति, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
दीक्षांत समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बिलासपुर से मनाली के लिए रवाना हो गईं। मनाली के सासे हेलीपैड पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने हाथ हिलाकर उनका भव्य अभिवादन किया। राष्ट्रपति के हिमाचल दौरे को देखते हुए बिलासपुर, मनाली और अटल टनल क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता और कड़े बंदोबस्त किए गए थे। अकेले एम्स परिसर और आसपास के क्षेत्र में करीब 250 पुलिस व होमगार्ड के जवान तैनात रहे।
दौरे के चलते आज एम्स की नियमित ओपीडी रही बंद
राष्ट्रपति के दीक्षांत समारोह और सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए मंगलवार को एम्स बिलासपुर की नियमित ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी, ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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