रैल नादौन में छात्रों से संवाद करते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू

ग्राउंड ज़ीरो रैल से सीधी रिपोर्ट: गृह क्षेत्र नादौन में CM सुक्खू के कड़े तेवर, स्कूली बच्चों से सीधा संवाद; देश के पहले एलाइड हेल्थ केयर कॉलेज और किशाऊ समझौते पर खोला मोर्चा

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​रैल/नादौन (उमांशी राणा, वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक):
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के अपने गृह विधानसभा क्षेत्र नादौन के अंतर्गत पड़ते ब्लॉक व तहसील नादौन के गांव रैल में आज भारी सियासी व विकासात्मक हलचल देखने को मिली। ‘पंजाब दस्तक’ की ओर से जब वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा सीधे रैल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचीं, तो वहां सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं, बल्कि जनता की नब्ज टटोलती सरकार और युवाओं की सीधी आवाज़ सुनाई दी। मुख्यमंत्री ने रैल की धरती से नादौन आईटीआई के अतिरिक्त भवन खंड (लागत ₹1.43 करोड़) सहित कुल तीन अहम विकास परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास कर क्षेत्र को बड़ी सौगातें सौंपीं।


​रैल स्कूल के छात्रों की खरी-खरी: पेपर लीक और सफाई पर मुख्यमंत्री से तीखे सवाल
कार्यक्रम के दौरान रैल स्कूल के छात्र-छात्राओं ने मुख्यमंत्री के समक्ष बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। एक छात्रा ने खुलकर सवाल किया कि समाज में सफाई के काम को छोटा क्यों माना जाता है और कजाकिस्तान जैसी आधुनिक स्वच्छता व्यवस्था हिमाचल में कब धरातल पर उतरेगी? मुख्यमंत्री ने छात्रा की सोच की सराहना करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के स्वच्छता संदेश को रस्म अदायगी से निकालकर जन-आंदोलन का रूप देना होगा; जब तक हम अपने परिवेश की जिम्मेदारी खुद नहीं लेंगे, बात नहीं बनेगी।


​वहीं जब एक छात्र ने देश भर में चर्चित ‘नीट पेपर लीक’ के कारण युवाओं पर पड़ने वाले भारी मानसिक दबाव का दर्द बयां किया, तो मुख्यमंत्री ने बेहद तल्ख़ तेवरों में कहा कि युवाओं की मेहनत की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार के समय प्रदेश में प्रश्नपत्रों की जो बोलियां लगाई जाती थीं, वर्तमान सरकार ने आते ही उस भ्रष्ट तंत्र की कमर तोड़ दी है और अब भर्तियां पूरी शुचिता और पारदर्शी तरीके से हो रही हैं। सीबीएसई पाठ्यक्रम को लेकर भी जब उन्होंने छात्रों से राय ली, तो विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इसे बेहद उपयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।


​स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी कदम: देश का पहला एलाइड हेल्थ केयर कॉलेज
रैल के मंच से स्वास्थ्य क्षेत्र का कच्चा-चिट्ठा खोलते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में देश का पहला ‘एलाइड हेल्थ केयर कॉलेज’ स्थापित करने की बड़ी घोषणा की। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य के बड़े चिकित्सा महाविद्यालयों में 19 साल पुरानी कबाड़ हो चुकी एमआरआई मशीनों के भरोसे जनता की जान से समझौता किया जा रहा था। अस्पतालों में केवल 35 फीसदी स्टाफ मौजूद था, जिसे मौजूदा सरकार ने कड़े कदम उठाकर 60 फीसदी से पार पहुंचाया है। अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी तैनाती और आधुनिक डायग्नोस्टिक लैब स्थापित कर स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक मजबूत किया जा रहा है।


​किशाऊ परियोजना: केंद्र के आगे नहीं झुके, 1500 करोड़ के हक की लड़ी लड़ाई
अंतरराज्यीय किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते के अंदरूनी घटनाक्रम का पर्दाफाश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद इस पर तीन अहम दौर की वार्ताएं हुईं।
मुख्यमंत्री ने कहा:
​”दिल्ली, यूपी और राजस्थान जैसे राज्यों की प्यास बुझाने के लिए केंद्र ने 90 फीसदी लागत खुद वहन करने की बात कही, लेकिन बिजली निर्माण के नाम पर हिमाचल और उत्तराखंड दोनों पर 50-50 फीसदी कर्ज का बोझ लादने का दबाव बनाया गया। मैंने केंद्र को दो टूक कह दिया कि हिमाचल की भोली-भाली जनता पर हम नया कर्ज नहीं चढ़ने देंगे। हमें 12 फीसदी की ‘फ्री रॉयल्टी’ की खैरात नहीं, अपना 100 फीसदी अधिकार चाहिए। अगर प्रदेश में भाजपा की सरकार होती तो उत्तराखंड की तरह मौन रहकर घुटने टेक देती और हिमाचल के 1200 से 1500 करोड़ रुपये डूब जाते। यह हिमाचल की 75 लाख जनता का हौसला था, जिसके दम पर हमने प्रदेश के हितों से रत्ती भर भी समझौता नहीं किया।”


​वाइल्ड फ्लावर हॉल और कोर्ट में प्रदेश की संपदा की सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि पिछले 23 वर्षों से अदालतों में उलझे बहुचर्चित ‘वाइल्ड फ्लावर हॉल’ के मामले को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पूरी ताकत से जीता, जिसके चलते प्रदेश के सरकारी खजाने में ₹401 करोड़ जमा हुए और हर महीने करीब ₹2 करोड़ की पक्की आय का रास्ता खुला। वहीं जेएसडब्ल्यू कंपनी से भी 6 फीसदी अतिरिक्त रॉयल्टी व अधिकार हासिल किए गए। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक वे इस कुर्सी पर बैठे हैं, किसी लालच या सियासी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और जनसंपदा की एक-एक पाई की पहरेदारी करेंगे।


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मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र नादौन के गांव रैल से उठी इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट, शिक्षा-स्वास्थ्य के बड़े फैसलों और जल अधिकारों पर सरकार के कड़े रुख पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार ज़रूर साझा करें।
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