हरौली की सियासत पर प्रोफेसर रामकुमार का मुकेश अग्निहोत्री पर पलटवार

पंजाब दस्तक एक्सक्लूसिव: हरौली की सियासी जंग में तीखे बाण और सीधा मुकाबला

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​ऊना / हरौली:
हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के हालिया बयान पर हरौली का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। मुकेश अग्निहोत्री द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगाए गए गाली-गलौज के आरोपों पर हरौली से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी प्रोफेसर रामकुमार ने करारा और धारदार पलटवार किया है। पंजाब दस्तक के वरिष्ठ पत्रकार काजल ने जब प्रोफेसर रामकुमार से तीखे सवाल दागे, तो उन्होंने चुटीले अंदाज, कभी मुस्कुराते तो कभी तंज कसते हुए दो-टूक जवाब दिए। पेश हैं इस विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश:


​काजल (पंजाब दस्तक): उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री आरोप लगा रहे हैं कि हरौली के भाजपा कार्यकर्ता उन्हें दिन-रात गालियां निकालते रहते हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
प्रोफेसर रामकुमार (हंसते हुए): यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, हास्यास्पद और खिसियाहट भरा है। भारतीय जनता पार्टी में गाली-गलौज की कोई संस्कृति नहीं है। अगर उनके आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो मुकेश अग्निहोत्री भाजपा के किसी एक भी कार्यकर्ता का ऐसा वीडियो या ऑडियो साक्ष्य सार्वजनिक करें जिसमें कांग्रेस को गाली दी गई हो। (मुस्कुराते हुए चुटकी लेते हैं) असल सच तो यह है कि अपशब्दों के प्रयोग में स्वयं मुकेश अग्निहोत्री माहिर हैं और उनके पास इस विधा का लंबा ‘वर्क एक्सपीरियंस’ है। अगर वे चाहते हैं कि कांग्रेसियों को गालियां दी जाएं, तो भाजपा उन्हें इसकी ट्रेनिंग देने के लिए आमंत्रित कर सकती है। दूसरों को ज्ञान देने से पहले वे खुद अपनी भाषा और अपने आचरण पर ध्यान दें।


​काजल (पंजाब दस्तक): आपने बेहद आक्रामक अंदाज में पूछा है कि ‘क्या मुकेश अग्निहोत्री डॉन हैं?’ आखिर यह सवाल उठाने की नौबत क्यों आई?
प्रोफेसर रामकुमार: जिस प्रकार की धमकी भरी भाषा और डराने वाला अंदाज उप मुख्यमंत्री अपना रहे हैं, वह किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि की भाषा नहीं हो सकती। हम सीधा पूछते हैं—क्या मुकेश अग्निहोत्री डॉन हैं? क्या वे अंडरवर्ल्ड के बंदे हैं या अतीक अहमद के आदमी हैं? एक संवैधानिक पद पर बैठकर माफिया शैली और धौंस की भाषा अपनाना अत्यंत अशोभनीय है। जनता ने उन्हें सेवक चुना है, कोई सुल्तान या माफिया नहीं।


​काजल (पंजाब दस्तक): उप मुख्यमंत्री द्वारा खुले मंचों से अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘निपटाने’ वाले बयानों को आप किस नजरिए से देखते हैं?
प्रोफेसर रामकुमार: खुले मंचों से सरकारी मशीनरी को अपमानित करना और धमकाना तानाशाही रवैया दर्शाता है। रात के अंधेरे में अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘निपटा देने’ जैसी धमकियां देना लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाना है। प्रशासनिक तंत्र नियमों और संविधान से चलता है, किसी की निजी धौंस से नहीं। इस तरह की भाषा उप मुख्यमंत्री पद की गरिमा को तार-तार करती है।


​काजल (पंजाब दस्तक): एक बड़ा सियासी सवाल यह उठता है कि लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा और अनुराग ठाकुर को प्रचंड बढ़त मिलती है, लेकिन विधानसभा चुनाव आते ही कांग्रेस बाजी मार जाती है। क्या हरौली भाजपा में कोई गुटबाजी है या दो फाड़ हैं? क्या पार्टी के लोग ही एक-दूसरे का साथ नहीं देते?
प्रोफेसर रामकुमार (मुस्कुराते हुए): देखिए काजल जी, न तो यहां कोई दो फाड़ हैं और न ही भाजपा में कोई गुटबाजी है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे, मिजाज और परिस्थितियां बिल्कुल अलग होती हैं। लोकसभा चुनाव में जनता राष्ट्रहित, केंद्र की मजबूत नीतियों और अनुराग ठाकुर के विकास कार्यों पर मुहर लगाती है। विधानसभा चुनाव में स्थानीय समीकरण, सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और सत्ता का दबाव काम करता है। हरौली में भाजपा का हर कार्यकर्ता अनुशासित और पूरी तरह एकजुट है, बूथ स्तर पर हमारे सिपाही डटकर मुकाबला करते हैं। हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संगठन में फूट जैसी बात बिल्कुल बेबुनियाद है।


​काजल (पंजाब दस्तक): 25 सालों का सियासी सफर, हार-जीत और हरौली के प्रति जवाबदेही को आप किस रूप में देखते हैं?
प्रोफेसर रामकुमार (शांत भाव से मुस्कुराते हुए): राजनीति में हार-जीत तो चलती रहती है। 25 सालों का सियासी सफर गवाह है, जनता ही सर्वोपरि है और फैसला उसी की अदालत में होता है। हमारी नीतियां केवल और केवल जनसेवा की हैं और हमारी पूरी जवाबदेही हरौली की जनता के प्रति है। लोकतंत्र में जनता जिसे चाहे अर्श पर बिठाती है और जिसे चाहे फर्श पर ला देती है। सत्ता के नशे में इतना घमंड और अहंकार ठीक नहीं होता। ईश्वर जब भी मौका देगा, हम पूरी निष्ठा से जनता की सेवा करेंगे। राजनीति अहंकार से नहीं, संस्कार और सेवा भाव से चलती है।


​काजल (पंजाब दस्तक): उप मुख्यमंत्री की इस ताजा बयानबाजी और आक्रामकता के पीछे असल वजह क्या है?
प्रोफेसर रामकुमार (हंसते हुए): इसकी सीधी और एकमात्र वजह हरौली में भाजपा की प्रचंड एकजुटता है। आज हरौली में भाजपा पूरी तरह संगठित और मजबूत खड़ी है। कार्यकर्ताओं की यह ताकत देखकर मुकेश अग्निहोत्री अपनी खिसकती सियासी जमीन से घबरा गए हैं। इसी हताशा और बौखलाहट में वे अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं।
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