शिमला चौड़ा मैदान में हिमाचल पेंशनरों के महाहल्ला बोल की तैयारी

शिमला के चौड़ा मैदान में आर-पार की जंग: धर्मशाला तपोवन के जोरावर स्टेडियम और शिमला के बाद 1 सितंबर को तीसरी बार 25 से 30 हजार बुजुर्ग पेंशनर करेंगे महाहल्ला बोल, क्या यही है ‘व्यवस्था परिवर्तन’?

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​विशेष रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा (पंजाब दस्तक)
शिमला: हिमाचल प्रदेश के इतिहास में बुजुर्ग पेंशनरों के आक्रोश का ऐसा सैलाब 1 सितंबर को देखने को मिलेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया होगा। धर्मशाला में विधानसभा परिसर तपोवन के ठीक बाहर स्थित ऐतिहासिक जोरावर स्टेडियम और पिछली बार शिमला विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान में हुई विशाल रैलियों के बाद अब यह लगातार तीसरी बार है जब प्रदेशभर से 25 से 30 हजार से अधिक पेंशनर राजधानी के चौड़ा मैदान में महाहल्ला बोलने जा रहे हैं।

जीवन के 30 से 35 सुनहरे साल सरकारी सेवा को समर्पित करने वाले ये बुजुर्ग, जिन्हें इस पड़ाव पर नाती-पोतों के साथ घर पर सुकून से रहना चाहिए था, आज अपने ही हकों और गाढ़ी कमाई के लिए तीसरी बार सड़कों पर गर्जने को विवश हैं।
​चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला, किन्नौर और लाहौल-स्पीति सहित प्रदेश के सभी 12 जिलों के कोने-कोने से पेंशनर जत्थों के रूप में राजधानी पहुंचेंगे। 18 विभिन्न पेंशनर संगठनों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ सीधे मुकाबले का बिगुल फूंक दिया है। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख भूपराम समेत तमाम शीर्ष पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह स्वाभिमान और जीवनभर की कमाई की लड़ाई है।


​जोरावर स्टेडियम व शिमला के बाद तीसरी बार 25 से 30 हजार का संख्याबल: धर्मशाला तपोवन के बाहर जोरावर स्टेडियम और फिर शिमला चौड़ा मैदान में विधानसभा के बाहर अपनी ताकत दिखाने के बाद, अब तीसरी बार प्रदेशभर के पेंशनर अपनी वित्तीय देनदारियों के लिए एक मंच पर आ रहे हैं।


​वर्ष 2016 से लंबित एरियर व डीए: संशोधित वेतनमान का बकाया एरियर, महंगाई भत्ते की किस्तें और लंबे समय से अटके मेडिकल बिलों का तुरंत भुगतान मुख्य मांग है।
​स्वयंभू नेताओं को आईना—ईगो भूलें, एक झंडे तले आएं: आंदोलन के बीच कुछ तथाकथित ‘स्वयंभू नेता’ अपने निजी स्वार्थ और ईगो के चलते इस एकजुटता में अड़ंगा लगाने की कोशिश कर रहे हैं और केंद्रीय संगठनों की आड़ लेकर माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। पेंशनर मंच ने ऐसे नेताओं को दो टूक नसीहत दी है कि जीवन के इस पड़ाव में अब उम्र आपस में लड़ने की नहीं, बल्कि संयम बरतने, एकता दिखाने और एकजुट होकर अपना हक हासिल करने की है। अगर थोड़ी सी भी समझ और अंतरात्मा बाकी है, तो अपने ईगो को पूरी तरह भूलकर सभी को एक साथ, एक मंच और एक झंडे के तले आना चाहिए ताकि सरकार से बुजुर्गों का वाजिब हक और पैसा निकाला जा सके। 1 सितंबर का यह ऐतिहासिक महाजुटान ऐसे स्वयंभू नेताओं को भी कड़ा संदेश देगा।


​व्यवस्था परिवर्तन पर तीखे सवाल: तपोवन के जोरावर स्टेडियम और शिमला विधानसभा के बाहर पहले दो बड़े प्रदर्शनों के बाद भी जब सरकार ने सुध नहीं ली, तो अब तीसरी बार बुजुर्गों को शिमला में गरजना पड़ रहा है। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक परंपरा में मुख्यमंत्री का बयान ‘पत्थर की लकीर’ माना जाता है, लेकिन आज वादों के बावजूद बुजुर्गों को बार-बार धरने देने पड़ रहे हैं। चार साल का कार्यकाल पूरा कर रही सरकार से बुजुर्ग यह सीधा सवाल पूछ रहे हैं—क्या बार-बार बुजुर्गों को सड़कों पर लाना ही व्यवस्था परिवर्तन है?


​चौड़ा मैदान से 1 सितंबर को इस ऐतिहासिक महाजुटान की हर हलचल और सीधी लाइव रिपोर्ट ग्राउंड जीरो से ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा सीधे पंजाब दस्तक पर देंगे। जो पेंशनर शिमला नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे पल-पल की ताजा अपडेट्स के लिए सीधे पंजाब दस्तक से जुड़े रहें।
​डाडासीबा में सीएम सुक्खू से मिले नियमित पैरा शिक्षक: वरिष्ठता और पेंशन लाभ की उठाई मांग


​विशेष रिपोर्ट: उमांशी राणा, वरिष्ठ पत्रकार (पंजाब दस्तक)
​डाडासीबा (कांगड़ा):
पेंशनरों के बढ़ते आक्रोश के बीच डाडासीबा में हिमाचल प्रदेश के करीब 1700 नियमित पैरा शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
​’प्रदेश पैरा रेगुलर टीचर एसोसिएशन’ ने वर्ष 2003 की पैरा शिक्षक नीति के तहत नियुक्त शिक्षकों को उनकी आरंभिक नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता, पेंशन और नियमितीकरण के सभी सेवा लाभ देने की पुरजोर मांग की।
​एसोसिएशन ने टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति के लंबित मामलों का तुरंत निपटारा करने की गुहार भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।


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