सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला:
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर महंगाई भत्ते (DA) की नई किस्त और बकाए एरियर की आस लगाए बैठे हिमाचल प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के हाथ एक बार फिर मायूसी लगी है। 15 अगस्त के राज्यस्तरीय समारोह में सरकार की ओर से डीए व एरियर को लेकर कोई घोषणा न होने के बाद प्रदेश भर के कर्मचारियों और पेंशनरों में गहरा असंतोष फैल गया है। हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवा कर्मचारी संगठन, विधानसभा गैर-राजपत्रित कर्मचारी महासंघ, संयुक्त कर्मचारी महासंघ, गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन और पेंशनरों के 18 संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने सरकार के इस रुख पर अपनी गंभीर चिंता और ऐतराज दर्ज कराया है।
पेंशनर नेताओं सुरेश ठाकुर और भूपराम वर्मा ने उठाई आवाज: ‘टुकड़ों में एरियर बांटना नामंजूर’
पेंशनर संघर्ष समिति के प्रमुख नेता सुरेश ठाकुर और भूपराम वर्मा ने सरकार की ओर से पेंशनरों को टुकड़ों में एरियर देने के फॉर्मूले (क्लास-1 व क्लास-2 पेंशनरों के लिए 15% तथा क्लास-3 पेंशनरों के लिए 35%) पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों ने जीवन के 35 से 38 साल प्रदेश की निष्ठापूर्वक सेवा में लगाए हैं। आज बुढ़ापे में जब पेंशनरों को दवाइयों, इलाज और दैनिक जरूरतों के लिए पैसे की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब 15% और 35% जैसी किस्तों में भुगतान करना बुजुर्गों की समस्याओं का हल नहीं है।
भूपराम वर्मा ने भावुक लहजे में कहा—”सरकार के पास पेंशनरों का पैसा सुरक्षित है, यह हम मानते हैं। लेकिन अगर जीवन भर सेवा करने के बाद यह पैसा हमारे इस दुनिया से जाने के बाद मिलेगा, तो उस पैसे का हम क्या करेंगे? इस उम्र में अपने ही वित्तीय लाभों के लिए तरसना बेहद दुखद है।”
दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि 18 पेंशनर यूनियनों का संयुक्त मोर्चा पेंशनरों के लिए एकमुश्त और सम्मानजनक भुगतान की मांग करता है।
कर्मचारियों के डीए पर महासंघ का रुख
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से लंबित डीए की किस्त तुरंत जारी करने की मांग दोहराई है। कर्मचारी महासंघ का कहना है कि:
महंगाई भत्ता कोई अतिरिक्त लाभ या चुनावी बोनस नहीं, बल्कि बेलगाम महंगाई के बीच वेतन की वास्तविक क्रय शक्ति बनाए रखने का कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है।
आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच डीए रोकने से सेवारत कर्मचारियों के घरेलू बजट पर भारी दबाव पड़ रहा है।
आंकड़ों में समझिए ₹12,000 करोड़ की देनदारियों की स्थिति:
₹5,000 करोड़ का डीए एरियर: महासंघ के अनुसार डीए एरियर का कुल बकाया आंकड़ा लगभग ₹5,000 करोड़ तक पहुंच चुका है।
15% लंबित डीए की देनदारी: कर्मचारियों को वर्तमान में 45% डीए मिल रहा है जबकि 60% देय है। इस 15% लंबित अंतर के कारण सरकार पर हर साल ₹2,500 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय दायित्व बन रहा है।
₹7,000 करोड़ का वेतन-पेंशन एरियर: नए वेतनमान और पेंशन संशोधन के बकाए का लगभग ₹7,000 करोड़ का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है।
1 जुलाई 2022 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों का मामला
यूनियनों ने 1 जुलाई 2022 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के वित्तीय नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है:
लागू करने की तिथि से प्रभाव: इस अवधि के बाद देय तीन डीए किस्तों को वास्तविक पिछली तिथि से एरियर सहित देने के बजाय आगामी तिथियों से लागू किया गया।
पेंशन और ग्रेच्युटी पर असर: इसके चलते उस दौरान सेवानिवृत्त हुए कर्मियों की ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और पेंशन का निर्धारण प्रभावित हुआ, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। संगठनों ने इस विसंगति को दूर कर सभी लाभों की नियमानुसार पुनर्गणना की मांग की है।
सचिवालय, विधानसभा सहित तमाम विभागों के कर्मचारी संगठनों और 18 पेंशनर यूनियनों के प्रतिनिधियों ने सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारियों के डीए और पेंशनरों के बकाया एरियर के समाधान के लिए जल्द ठोस व सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
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