सुधीर शर्मा का विजिलेंस FIR और मीडिया ट्रायल पर बयान

विधायक सुधीर शर्मा का विजिलेंस पर बड़ा हमला: डराने और मीडिया ट्रायल के लिए कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग, कोर्ट जाते ही दर्ज की FIR

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​विशेष रिपोर्ट: उमांश | पंजाब दस्तक
धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश)


​हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने राज्य की जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ किसी निष्पक्ष जांच के बजाय डराने, दबाने और सार्वजनिक तौर पर मीडिया ट्रायल चलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है।


​अदालत का दरवाजा खटखटाते ही बदले की भावना से FIR
​विधायक सुधीर शर्मा ने बताया कि विजिलेंस अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ उन्होंने धर्मशाला के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत में कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। लेकिन जैसे ही उन्होंने न्यायपालिका का रुख किया, ठीक उसके बाद बदले की भावना से उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दी गई।
​उन्होंने स्पष्ट कहा कि सक्षम न्यायालय से अपने अधिकारों की रक्षा मांगना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसे आधार बनाकर इस तरह दबाव बनाना पूरी तरह गैर-कानूनी और अनुचित है।


​नोटिस की गोपनीयता और समय सीमा पर गंभीर सवाल
​पूरे घटनाक्रम में नोटिस की गोपनीयता और उसकी टाइमिंग को लेकर सबसे बड़ा खुलासा हुआ है:
​तारीखों की सच्चाई: विधायक के अनुसार, संबंधित नोटिस उनके कार्यालय में 12 अगस्त 2026 को तामील कराया गया, जबकि उसकी प्रतियां और विषय-वस्तु एक दिन पहले यानी 11 अगस्त 2026 को ही मीडिया में प्रसारित कर दी गई थी।


​मीडिया ट्रायल की मंशा: उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानूनी नोटिस का मूल उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देना होता है, तो वह उन तक पहुंचने से पहले मीडिया तक कैसे और क्यों लीक हुआ?
​सुधीर शर्मा ने इसे प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन करार देते हुए कहा कि आधिकारिक तौर पर उनका पक्ष आने से पहले ही जनता के बीच उनकी छवि को धूमिल करने की सोची-समझी साजिश रची गई।


​स्वतंत्र जांच और निष्पक्ष सुनवाई की मांग
​विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि उन्हें देश के कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने मांग की:
​पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह सच सामने आ सके कि गोपनीय नोटिस मीडिया में कैसे लीक हुआ।
​अदालत जाने के तुरंत बाद दर्ज की गई FIR के पीछे की मंशा की उच्चस्तरीय जांच हो।


​जांच लंबित रहने के दौरान एकतरफा जानकारी लीक करने पर तुरंत रोक लगे और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर मिले।
​”मैं कानून के तहत हर निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हूं, लेकिन जांच प्रक्रिया को राजनीतिक उत्पीड़न या प्रतिशोध का जरिया कतई नहीं बनने दिया जाएगा।”


सुधीर शर्मा, विधायक (धर्मशाला)
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