शाहपुर में 1500 से अधिक पेंशनरों का प्रदर्शन और महासम्मेलन

व्यवस्था परिवर्तन या विश्वासघात? शाहपुर में 18 पेंशनर संगठनों का प्रचंड महासंग्राम, सुक्खू सरकार के खिलाफ आर-पार का ऐलान

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​सुरेंद्र राणा की ग्राउंड रिपोर्ट
पंजाब दस्तक (शाहपुर, हिमाचल प्रदेश)


​1,500 से अधिक बुजुर्गों ने सड़कों पर उतरकर भरी हुंकार: “मुख्यमंत्री का शब्द भगवान की आवाज और पत्थर की लकीर होता है, लेकिन यहाँ सिर्फ छलावा मिला!”


​शाहपुर (8 अगस्त 2026):
जिस उम्र में पोते-पोतियों के साथ घर में विश्राम मिलना चाहिए था, उस उम्र में हिमाचल प्रदेश के 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों को अपने ही हक की गाढ़ी कमाई के लिए सड़कों की धूल फांकनी पड़ रही है। शिमला जिला के 12 ब्लॉकों से आए 137 से अधिक पेंशनर प्रतिनिधियों सहित प्रदेश भर के 12 जिलों से पहुंचे लगभग 1,500 बुजुर्गों ने शनिवार को शाहपुर की सड़कों को अपने आक्रोश से थर्रा दिया। हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेशव्यापी आह्वान पर 18 बड़े पेंशनर संगठनों ने अभिनंदन पैलेस शाहपुर में महाअधिवेशन रचा और सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार के महासंग्राम की घोषणा कर दी।


​“जब मुख्यमंत्री बोलते हैं, लोग रेडियो और टीवी से चिपक जाते हैं… लेकिन अब विश्वास टूटना दुखद है!”
​शाहपुर के मुख्य बाजार से सभा स्थल तक सुबह 9:00 बजे निकली विशाल विरोध रैली के दौरान बुजुर्गों का गुस्सा चरम पर था। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर और मंच पर मौजूद तमाम प्रांतीय नेताओं ने सरकार के रवैये पर सीधे तीखे प्रहार किए।
​“लोकतंत्र और सूबे की परंपरा में मुख्यमंत्री का पद केवल एक प्रशासनिक पद नहीं होता, बल्कि एक विश्वास और भगवान तुल्य अभिभावक का स्वरूप होता है। मुख्यमंत्री के मुख से निकला हर शब्द ‘भगवान की आवाज’ और ‘पत्थर की लकीर’ माना जाता है। जब मुख्यमंत्री बोलते हैं, तो पूरा प्रदेश रेडियो कान में लगाकर और टीवी के सामने बैठकर उन्हें सुनता है।

लेकिन अफ़सोस! 13 मई 2026 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संयुक्त संघर्ष समिति के साथ हुई बैठक में फैसला लिया था कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के बकाया 40% एरियर का भुगतान 31 जुलाई 2026 तक कर दिया जाएगा। 31 जुलाई बीत गई, लेकिन बुजुर्गों के हाथ सिर्फ धोखा आया। रैली में बुजुर्ग दबी जुबां में भी दर्द बयां कर रहे थे कि आख़िर मुख्यमंत्री जी बोलते कुछ हैं और करते कुछ क्यों हैं? अगर यही हाल रहा तो मुख्यमंत्री के पद से जनता का विश्वास ही उठ जाएगा!”


सुरेश ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष (हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति)
​’पंजाब दस्तक’ का तीखा सवाल: आख़िर 2016 से 2022 के बीच रिटायर हुए बुजुर्गों का क्या कसूर है?
​पंजाब दस्तक प्रशासन और सरकार से एक सीधा और चुभता हुआ सवाल पूछता है— आख़िर 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए इन बुजुर्ग कर्मचारियों का क्या कसूर है? इन्होंने क्या गुनाह किया था कि यह उस दौरान रिटायर हुए?
​अधिकारों से वंचित क्यों?: जब सेवा के दौरान इन्होंने पूरी ईमानदारी से हिमाचल प्रदेश की तरक्की में अपना जीवन खपा दिया, तो आज अपने ही संशोधित एरियर, संशोधित ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव इनकैशमेंट और संशोधित पेंशन के पैसों के लिए इन्हें मोहताज क्यों बनाया जा रहा है?
​चहेतों को एक्सटेंशन और पेंशनरों को उपेक्षा?: एक तरफ सरकार में बैठे कुछ चहेतों को सेवानिवृत्ति के बाद भी एक्सटेंशन (सेवा विस्तार) की रेवाड़ियां बांटी जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दशकों तक राज्य की सेवा करने वाले बुजुर्गों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
​दुनिया से रुखसत होने के बाद मिलेगा पैसा?: हर महीने कई बुजुर्ग पेंशनर बिना अपना हक पाए ही इस दुनिया से स्वर्ग सिधार रहे हैं। जब इंसान ही नहीं रहेगा, तो बाद में मिलने वाले उस पैसे का क्या फायदा? क्या सरकार चाहती है कि बुजुर्ग अपने हक का पैसा देखे बिना ही अलविदा कह जाएं?


​महाअधिवेशन में उठीं मुख्य मांगें: कॉरपोरेट सेक्टर से लेकर निकाय कर्मचारियों तक न्याय की मांग
​संयुक्त संघर्ष समिति ने सर्वसम्मति से अपनी प्रमुख मांगों का एजेंडा सरकार के समक्ष रखा:
​100% बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान: 1/1/2016 से 31/1/2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की संशोधित पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और लीव इनकैशमेंट की शत-प्रतिशत (100%) बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाए।
​महंगाई राहत व डीए का बकाया: महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DR) की 15% बकाया किस्तों की अदायगी तुरंत हो।
​कॉरपोरेट सेक्टर 1999 की अधिसूचना की बहाली: कॉरपोरेट सेक्टर पेंशनरों के लिए 1999 की अधिसूचना को पुन: बहाल किया जाए।


​शहरी निकायों के कर्मचारियों का निपटारा: शहरी निकायों (Urban Local Bodies) के कर्मचारियों और पेंशनरों को 1/1/2016 के संशोधित वेतनमान के आधार पर लंबित पड़े पेंशन मामलों को तय करके जल्द से जल्द वित्तीय लाभों की अदायगी की जाए।
​HRTC पेंशनरों के लिए स्थाई समाधान: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के पेंशनरों को हर महीने की 1 तारीख को पेंशन, 3% महंगाई भत्ता और ₹5,000 की मेडिकल कैशलेस/कैश सुविधा नियमित रूप से दी जाए।
​लंबित मेडिकल बिलों का तुरंत क्लीयरेंस: इलाज के लिए भटक रहे बुजुर्गों के महीनों से बजट के नाम पर रोके गए चिकित्सा बिलों का भुगतान तत्काल किया जाए।


​वंदे मातरम से शुरुआत, दिवंगत साथियों को नम आंखों से श्रद्धांजलि
​महासम्मेलन का आगाज़ देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रीय गीत के उद्घोष से हुआ। इसके बाद, हाल ही में काल के क्रूर कपाल में समाए दिवंगत पेंशनर साथियों की स्मृति में 2 मिनट का मौन धारण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके उपरांत उग्र प्रदर्शन करते हुए पेंशनरों ने शाहपुर के मुख्य बाजार से रैली निकालते हुए तहसीलदार शाहपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा चेतावनी पत्र (ज्ञापन) सौंपा।


​मंच से एक सुर में गरजीं 18 प्रमुख हस्तियां
​प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे दिग्गज पेंशनर नेताओं ने पंजाब दस्तक के मंच से सरकार को खुली चेतावनी दी। इस महासंग्राम की अगुवाई करने वालों में:
​श्री भूपराम वर्मा (सेक्रेटरी General, पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन एचपी)
​श्री ब्रह्मानंद (अध्यक्ष, भारतीय पेंशनर संघ)
​श्री प्रभु दयाल वर्मा (हिमाचल पेंशनर फेडरेशन)
​श्री बृजलाल ठाकुर (अध्यक्ष, HRTC सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संघ)
​श्री मदनलाल शर्मा (अध्यक्ष, एचपी सेक्रेटेरिएट वेलफेयर एसोसिएशन)
​श्री डी. एस. ढडवालिया (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, विद्युत परिषद पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन)
​श्री शिव सिंह सेन (प्रधान, Local Urban B.D. पेंशनर संघ)
​श्री देवराज शर्मा (प्रधान, विद्युत परिषद सेवानिवृत्त पेंशनर संघ)
​श्री देवी लाल ठाकुर (प्रधान, कॉरपोरेट सेक्टर)
​श्री चमन भाटिया (अध्यक्ष, पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन एचपी)
​श्री बी. एस. चंदेल (अध्यक्ष, एचपी विश्वविद्यालय शिमला पेंशनर संघ)
​श्री बलराम Puri (पूर्व प्रधान, HRTC)
​श्री देवी सिंह ठाकुर (कॉरपोरेट सेक्टर)
​सहित 18 संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रदेश का बुजुर्ग अब झूठे आश्वासनों की अफीम चाटने वाला नहीं है।


​अक्टूबर में उग्र आंदोलन: गांव-गांव तक पहुंचेगी आक्रोश की ज्वाला
​शाहपुर अधिवेशन में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगर सरकार ने अपनी मनमानी बंद नहीं की, तो आंदोलन अब गलियों और चौपालों तक फैलेगा:
​ब्लॉक स्तर पर मोर्चेबंदी: आगामी आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए तुरंत प्रभाव से राज्य भर में ब्लॉक स्तर की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
​अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में महाधरना: अक्टूबर 2026 के पहले हफ्ते में प्रदेश के सभी 12 जिला मुख्यालयों पर उग्र और व्यापक धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे।
​गांव-गांव में सरकार का विरोध: बुजुर्ग पेंशनर अब चुपचाप घर नहीं बैठेंगे, बल्कि गांव-गांव जाकर सरकार की वादाखिलाफी का पर्दाफाश करेंगे।


​सम्मान भी और चेतावनी भी
​अधिवेशन के अंत में शिमला, कांगड़ा सहित प्रदेश भर से आए तमाम पेंशनर प्रतिनिधियों का हिमाचली परंपरा के अनुसार बैंड-बाजे की धुन पर टोपी, मफलर और हार पहनाकर भव्य अभिनंदन किया गया। लेकिन इस सम्मान समारोह के पीछे छुपा आक्रोश साफ बता रहा था कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के इन बुजुर्गों का यह असंतोष आने वाले दिनों में सत्ता के गलियारों में बड़ा भूचाल लाने वाला है।


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