पंजाब दस्तक – विशेष रिपोर्ट
रिपोर्टर: सुरेंद्र राणा
स्थान: नई दिल्ली
नई दिल्ली:
देश में लंबे समय से जारी NEET और पेपर लीक विवाद के बीच आखिरकार केंद्र सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा है। करीब एक महीने से अधिक समय (36 दिन) से चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन और विपक्ष के चौतरफा दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, लेकिन बिगड़ते हालात और संसद की ठप होती कार्यवाही को देखते हुए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने पत्र में उन्होंने छात्रों से आंदोलन समाप्त कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।
किसान आंदोलन से तुलना और छात्रों की जीत
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दोलनकारियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की चर्चा तेज़ थी कि जब लगभग एक साल चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान तत्कालीन कृषि मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया था, तो शिक्षा मंत्री पद कैसे छोड़ेंगे। हालांकि, देश भर के छात्रों और युवाओं के एकजुट दबाव के आगे अंततः सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर डटे छात्रों और युवाओं (‘जेन-जी’) में खुशी की लहर दौड़ गई और वहां जश्न की तस्वीरें देखने को मिलीं।
कैसे शुरू हुआ आंदोलन: जंतर-मंतर से संसद तक
आंदोलन की शुरुआत: NEET पेपर लीक के बाद सोशल मीडिया से उपजी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CGP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के भारत लौटने पर जंतर-मंतर से इस प्रदर्शन की शुरुआत हुई।
प्रमुख हस्तियों का समर्थन: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन से इस आंदोलन को अभूतपूर्व गति मिली।
राजनीतिक दलों का प्रवेश: देखते ही देखते आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस आंदोलन से जुड़ गए।
सड़क से संसद तक उबाल: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेताओं के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठने से मामला राष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया।
सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी और कठोर कानून
दिल्ली पुलिस की दोपहर 2 बजे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह खुलासा किया गया कि देश का माहौल खराब करने के लिए पाकिस्तान से संचालित लगभग 400 सोशल मीडिया हैंडलरों की पहचान की गई है।
दूसरी ओर, स्थिति को संभालने और भविष्य में ऐसी धांधलियों को रोकने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक रोधी संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके तहत संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
आगे क्या?
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि CGP और प्रदर्शनकारी छात्रों का अगला कदम क्या होगा। क्या इस्तीफा और नए कानून का प्रस्ताव इस आंदोलन को शांत कर पाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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