विशेष खोजी रिपोर्ट: प्रभजोत कौर (वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक), चंडीगढ़/दिल्ली
पंजाब की राजनीति में इस वक्त का सबसे बड़ा और सनसनीखेज सियासी भूचाल आ गया है! कांग्रेस के बेहद आक्रामक और कद्दावर लोकसभा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अचानक देश के गृह मंत्री अमित शाह से बंद कमरे में मुलाकात की है। इस गुप्त और अहम मुलाकात की खबर जैसे ही सियासी गलियारों में पहुंची, पंजाब कांग्रेस से लेकर पूरी राजनीतिक लॉबी में हड़कंप मच गया है। हर कोई हैरान-परेशान है कि आखिर पंजाब की राजनीति में कौन सा नया ‘खेला’ होने जा रहा है!
क्या वाकई सिर्फ ‘मुद्दों’ की बात है या स्क्रिप्ट कुछ और है?
कांग्रेस के भीतर चल रही भयंकर अंदरूनी कलह और नाराजगी की अटकलों के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है। हालांकि, रंधावा ने बाहर आकर तुरंत सफाई दी और इसे पंजाब के हितों से जुड़ी मुलाकात बताया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर एक विशेष मांग पत्र (ज्ञापन) भी सौंपा। रंधावा के मुताबिक बातचीत के मुख्य बिंदु थे:
सरहदी सुरक्षा पर बड़ा खतरा: पंजाब की सीमाओं पर ड्रोन और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए सख्त कदम।
गैंगस्टर राज पर नकेल: पंजाब में लगातार पैर पसार रहे गैंगस्टर नेटवर्क और लॉ एंड ऑर्डर के बिगड़ते हालात पर गंभीर चिंता।
चन्नी की बगावत और चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी की ‘मिर्च’ ने बढ़ाया सियासी पारा!
सियासी पंडितों का मानना है कि ‘धुआं वहीं उठता है जहां आग लगी हो।’ यह मुलाकात ठीक उसी वक्त हुई है जब पंजाब कांग्रेस में हालिया फेरबदल के बाद भयंकर अंदरूनी कलह मची हुई है। एक तरफ राजा वड़िंग को प्रधान पद पर बरकरार रखने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मोरिंडा में अपने समर्थकों और पूर्व विधायकों की गुप्त बैठक बुलाकर आलाकमान के खिलाफ अपनी ताकत का खुला प्रदर्शन कर दिया है।
दूसरी तरफ, इन कमेटियों से पूरी तरह साइडलाइन किए गए चंडीगढ़ के कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर ‘गिद्दड़ सिंगी’ (antidote) और ‘नेताओं की असुरक्षा’ (insecurities) का जिक्र करते हुए ऐसा तीखा ट्वीट किया है, जिसने सुलगती आग में पूरी तरह घी डालने का काम किया है।
अंदरूनी बगावत की बू या बड़े राजनीतिक उलटफेर की तैयारी?
राजनीति के चाणक्य जानते हैं कि जब कांग्रेस के इतने बड़े स्तर के नेता एक तरफ बगावती रुख अपनाए हुए हों और दूसरी तरफ सुखजिंदर सिंह रंधावा सीधे देश के गृह मंत्री से मिल रहे हों, तो उसके मायने सिर्फ कागजी ज्ञापनों तक सीमित नहीं होते। चर्चाएं तेज हैं कि पंजाब कांग्रेस के अंदर जो लावा लंबे समय से सुलग रहा था, वह अब फटने की कगार पर है। क्या रंधावा पार्टी आलाकमान को अपनी ताकत का अहसास करा रहे हैं, या फिर पंजाब की सियासत में किसी बहुत बड़े उलटफेर की पटकथा लिखी जा चुकी है? इस मुलाकात ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है और सस्पेंस सातवें आसमान पर है!
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