CBI जांच में 7 IAS अधिकारियों के नाम, ₹645 करोड़ बैंक घोटाले पर बड़ी कार्रवाई

महाघोटाला: CBI की डायरी में 7 IAS के नाम, CM दफ्तर से बैरंग लौटा एक अफसर; 5 की उल्टी गिनती शुरू

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​पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी CBI के ‘सीक्रेट विंग’ की एंट्री, हर जिले में खुफिया नजर; मलाईदार पोस्टिंग के शौकीन अफसरों में हड़कंप


विशेष खोजी रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
चंडीगढ़

​हरियाणा के बहुचर्चित ₹645 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने पूरी उत्तर भारतीय नौकरशाही को हिलाकर रख दिया है। जैसे-जैसे इस महाघोटाले की परतें खुल रही हैं, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप की स्थिति है।
​सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई की जांच डायरी और संदिग्धों के बयानों में 7 आईएएस (IAS) अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इनमें से दो वरिष्ठ अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जबकि बाकी 5 अफसरों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।


​अब तक की बड़ी गिरफ्तारियां: दो सीनियर आईएएस सलाखों के पीछे
​सीबीआई इस महाघोटाले में भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलने के बाद अब तक दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है:
​आईएएस श्रीराम कुमार सिंह (आर.के. सिंह): पंचकूला नगर निगम में कमिश्नर रहते हुए इन पर करीब ₹79.46 करोड़ की सरकारी राशि को नियमों को ताक पर रखकर निजी बैंक में ट्रांसफर करने और उसे फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के जरिए शेल कंपनियों में डाइवर्ट करने का गंभीर आरोप है।


​आईएएस पंकज अग्रवाल: वर्ष 2000 बैच के इस बेहद सीनियर अधिकारी को सीबीआई ने हाल ही में दबोचा है। जांच में सामने आया है कि स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के खातों से करीब ₹60.54 करोड़ की हेराफेरी में इनकी सीधी संलिप्तता थी।


​सीएम दफ्तर से बैरंग लौटा अफसर; 5 और रडार पर
​जांच एजेंसियों के बढ़ते दबाव के बीच एक संदिग्ध आईएएस अधिकारी ने मामले को रफा-दफा करने और राजनीतिक ढाल बनाने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने का पुरजोर प्रयास किया था। लेकिन भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उक्त अफसर को मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति नहीं दी और उन्हें दफ्तर से बैरंग लौटा दिया।


​हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) की धारा 17A के तहत सीबीआई को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ खुली छूट (Free Hand) दे दी है। अब डायरी में दर्ज बाकी 5 आईएएस अधिकारियों के ठिकानों पर कभी भी छापेमारी हो सकती है।


​कैसे अंजाम दिया गया ₹645 करोड़ का यह महाघोटाला?
​सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की संयुक्त जांच के अनुसार, यह पूरा खेल सरकारी खजाने की सुनियोजित लूट थी:
​नियमों की धज्जियां: हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के नियमों को दरकिनार कर 8 सरकारी विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के पैसों को निजी बैंकों की शाखाओं में जमा कराया गया।


​शेल कंपनियों का नेटवर्क: अधिकारियों और बैंक मैनेजरों की मिलीभगत से सरकारी चेक और फंड को सीधे फर्जी शेल कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
​रियल एस्टेट में निवेश: जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस घोटाले की रकम को बाद में रियल एस्टेट सेक्टर और निजी कंपनियों में ठिकाने लगाकर खपाया गया। इस मामले में अब तक बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों समेत 17 से अधिक आरोपियों को चार्जशीट किया जा चुका है।


​पंजाब दस्तक का बड़ा खुलासा: पंजाब और हिमाचल में CBI के ‘सीक्रेट विंग’ की तैनाती, हर जिले में खुफिया निगरानी
​अंदरूनी सूत्र और गुप्त सूचना:
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली और बड़ी खबर यह आ रही है कि सीबीआई ने अब केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी अपनी रडार पूरी तरह से सक्रिय कर दी है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन दोनों राज्यों में सीबीआई के एक बेहद गोपनीय और ‘सीक्रेट विंग’ (Secret Wing) ने चुपचाप अपनी पोजीशन संभाल ली है।


​यह विंग इतना गुप्त है कि प्रशासनिक अमले को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही है। इस सीक्रेट विंग के अधिकारी हर जिले (District) में सादे कपड़ों और गुप्त पहचान के साथ घूम रहे हैं और उन संदिग्ध अफसरों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं जो मलाईदार पोस्टिंग ढूंढने और पैसों की अवैध लूट में लगे रहते हैं। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की अंदरूनी गतिविधियों, फाइलों और बेनामी संपत्तियों की जांच अंदर ही अंदर बहुत गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है।


​तीखी टिप्पणी: लाखों की सैलरी, आलीशान कोठियां… फिर भी करोड़ों की भूख क्यों?
​प्रशासनिक सेवा (IAS) में आने वाले इन अधिकारियों को सरकार हर महीने लाखों रुपये की मोटी तनख्वाह देती है। रहने के लिए आलीशान सरकारी कोठियां, गाड़ियां, नौकर-चाकर और समाज में सर्वोच्च सम्मान मिलता है। इसके बावजूद इन बड़े अफसरों की पैसों की भूख खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।


​मलाईदार पोस्टिंग की आड़ में जनता के खून-पसीने की कमाई को लूटने वाले इन अफसरों को अब यह समझ लेना चाहिए कि वे अपनी इस अवैध भूख को सीमित करें और एक आम मर्यादित कर्मचारी की तरह अपनी तय सैलरी और सुविधाओं में रहना सीखें। अब समय बदल चुका है, सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता अनिवार्य है। सीबीआई का यह गुप्त चक्रव्यूह अब किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शने के मूड में नहीं है। जल्द ही पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भी कुछ बड़े चेहरों बेनकाब हो सकते हैं।


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​ब्यूरो रिपोर्ट, पंजाब दस्तक।

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