ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा
रोहड़ू (ब्लॉक): सेब के गढ़ रोहड़ू और आसपास की बेल्ट से 18 मई की शाम और आज सुबह हुई बेमौसम ओलावृष्टि के बाद बागवानों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं। इस मई की शुरुआत में ही ओलों की मार से एंटी-हेल नेट्स (ओला-रोधी जाल) न होने के कारण सेब के फलों को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय बागवानी अधिकारियों की टीमें फील्ड से नदारद हैं, जिससे बागवानों में सरकार की बीमा और राहत योजनाओं के प्रति भारी रोष है।
चौपाल और कुपवी (ब्लॉक): जिला शिमला के सबसे दूर-दराज के ब्लॉक चौपाल और कुपवी को जोड़ने वाले मुख्य और संपर्क मार्ग लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनदेखी के कारण बदहाल हैं। कल दोपहर के बाद से ही तीखे मोड़ों पर डैमेज पैच के कारण गाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हमारी विशेष पड़ताल के अनुसार, स्वीकृत बजट होने के बाद भी ठेकेदारों की मनमानी के कारण इन ब्लॉकों में पैचवर्क का काम लटका हुआ है।
ठियोग (ब्लॉक): ठियोग उपमंडल के तहत आने वाले नागरिक अस्पताल की खस्ताहाल स्वास्थ्य व्यवस्था आज 19 मई की सुबह एक बार फिर उजागर हुई है। यहाँ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों को बिना इलाज के सीधे शिमला रेफर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े प्रशासनिक सुधारों का ढोल ठियोग ब्लॉक में पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
रामपुर (बुशहर ब्लॉक): रामपुर ब्लॉक के ग्रामीण डिपो में उपभोक्ताओं को मिलने वाले सरकारी राशन की क्वालिटी को लेकर कल शाम से ही महिलाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आज सुबह भी कई डिपो पर घटिया अनाज और दालों की सप्लाई के विरोध में ग्रामीणों ने नारेबाजी की। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की इस लापरवाही पर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मौन साधे हुए है।
सुन्नी (भज्जी ब्लॉक): सुन्नी ब्लॉक के तहत सतलुज नदी के तटीय इलाकों में अवैध खनन का काला कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। पुलिस और माइनिंग विभाग की कथित ढिलाई के चलते माफिया रात-दिन भारी मशीनरी लगाकर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे स्थानीय जल स्रोत सूख रहे हैं।
मशौबरा और बसंतपुर (ब्लॉक): पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मशौबरा ब्लॉक में जल शक्ति विभाग के ‘हर घर नल से जल’ के दावे पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुए हैं। गर्मियों की आहट के साथ ही पिछले 24 घंटों में यहाँ पानी की सप्लाई आधी रह गई है, जिससे स्थानीय होमस्टे मालिकों और ग्रामीणों को महंगे दामों पर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
शिमला (राज्य सचिवालय हलचल): राजधानी स्थित राज्य सचिवालय के गलियारों से आज सुबह 19 मई को यह पक्की खबर आ रही है कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई बड़ी विकास योजनाओं और विभागीय बजट आवंटन की फाइलें प्रशासनिक औपचारिकताओं के फेर में उलझ गई हैं। विभागों के आला अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय की कमी और लगातार चलती बैठकों के दौर के कारण विभिन्न जिलों के बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रशासनिक मंजूरियां सुस्त रफ्तार का शिकार हो रही हैं, जिससे नीतिगत फैसलों का धरातल पर उतरना लंबा खिंच रहा है।
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