वरिष्ठ पत्रकार, ओमांश
चंबा मुख्यालय: जिला मुख्यालय चंबा के ऐतिहासिक चौगान के सौंदर्यीकरण और रखरखाव को लेकर प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। चौगान के चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हैं और आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है, जिससे यहाँ घूमने आने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भारी परेशानी हो रही है। प्रशासन की इस सुस्ती को लेकर चंबा के प्रबुद्ध नागरिकों ने तीखी नाराजगी जताई है।
भरमौर: जनजातीय क्षेत्र भरमौर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर अचानक भारी भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने के कारण यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। सड़क के दोनों ओर सेब से लदे ट्रक और यात्रियों की गाड़ियां फंस गईं। लोक निर्माण विभाग (PWD) की मशीनरी मौके पर तो पहुंची, लेकिन रास्ता साफ करने की रफ्तार बेहद सुस्त है, जिससे लोगों को घंटों जाम में भूखे-प्यासे कटना पड़ा।
तीसा: चुराह घाटी के तीसा ब्लॉक के तहत आने वाले नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के अहम पद खाली होने से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर हैं। एक गंभीर मरीज को समय पर इलाज न मिलने के कारण तीमारदारों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। क्षेत्र की जनता को हर छोटे-बड़े इलाज के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज या टांडा रेफर कर दिया जाता है।
डलहौजी: मशहूर पर्यटन स्थल डलहौजी के माल रोड और सुभाष चौक पर बेतरतीब पार्किंग और स्थानीय नगर परिषद की लचर व्यवस्था के कारण सैलानियों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। वीकेंड की आमद के साथ ही वाहनों की कतारें लंबी हो गईं, लेकिन मौके पर ट्रैफिक को संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था, जिससे पर्यटन कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है।
सलूणी: सलूणी उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में जल शक्ति विभाग की लापरवाही के कारण पिछले तीन दिनों से पेयजल संकट गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत बिछाई गई पाइपें जगह-जगह से कटी हुई हैं, जिससे गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। मजबूरन ग्रामीणों को प्राकृतिक चश्मों से पानी ढोना पड़ रहा है।
चुवाड़ी (भटियात): भटियात विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। स्थानीय लिंक रोड के निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है और धरातल पर काम पूरी तरह शून्य है, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है।
चंबा (प्रशासनिक ढिलाई): जिला सचिवालय चंबा में विभिन्न सर्टिफिकेट (आय, जाति और हिमाचली बोनाफाइड) बनवाने के लिए दूर-दराज के गांवों से आए ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की लेटलतीफी और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण लोगों को छोटे से काम के लिए दो-दो दिनों तक चंबा शहर के होटलों में रुकना पड़ रहा है, जिससे उनका पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है।
सिहुंता: सिहुंता ब्लॉक के अंतर्गत आते एक सरकारी हाई स्कूल में स्टाफ की कमी के चलते छात्रों और अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, लेकिन मुख्य विषयों के शिक्षक न होने से नौनिहालों का भविष्य अंधकार में लटक गया है।
मैहला: मैहला ब्लॉक में पिछले 12 घंटों से हो रही अघोषित बिजली कटौती ने बिजली बोर्ड के दावों की पोल खोल दी है। बिना किसी पूर्व सूचना के लग रहे अघोषित कटों से छोटे कारोबारी और वर्क फ्रॉम होम करने वाले युवा बेहद परेशान हैं। बोर्ड के दफ्तर में फोन करने पर अधिकारियों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
पांगी: बर्फबारी के बाद पांगी घाटी को जोड़ने वाले दर्रों के खुलने के बावजूद आंतरिक सड़कों की हालत बेहद दयनीय है। एक सरकारी बस खस्ताहाल सड़क पर अनियंत्रित होने से बाल-बाल बची, जिससे यात्रियों की सांसें अटक गईं। परिवहन निगम की बसें जर्जर रूटों पर जोखिम उठाकर दौड़ रही हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बनीखेत: बनीखेत मुख्य बाजार में चोरों ने बीती रात एक सूनी दुकान का शटर उखाड़कर नकदी और कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया। सुबह जब दुकानदार पहुंचा तो उसे चोरी का पता चला। स्थानीय व्यापार मंडल ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए बाजार में रात्रि गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त करने की मांग की है।
चंबा (अवैध खनन): रावी नदी के तटीय इलाकों में खनन माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे जेसीबी मशीनें लगाकर नदी का सीना चीरा जा रहा है, जिससे जल स्रोत सूख रहे हैं और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। माइनिंग विभाग की रहस्यमयी चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
खजियार: मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले खजियार की खूबसूरत झील के संरक्षण को लेकर विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। झील के चारों ओर गंदगी और प्लास्टिक कचरे का अंबार लगा है, जिससे इस विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की खूबसूरती पर दाग लग रहा है। ठोस कचरा प्रबंधन की कोई उचित व्यवस्था यहाँ नजर नहीं आती।
चैड़ी: ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम करने वाले मजदूरों ने दिहाड़ी का भुगतान न होने को लेकर आज खंड विकास अधिकारी (BDO) दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। मजदूरों का कहना है कि मेहनत का पैसा न मिलने से उनके घरों का चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है और अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं।
भरमौर (धार्मिक पर्यटन): आगामी मणिमहेश यात्रा की तैयारियों को लेकर लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच आपसी तालमेल की भारी कमी दिख रही है। रास्ते के डैमेज पैच और पुलियों की मरम्मत का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अभी से चिंताएं बढ़ने लगी हैं।
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