दृष्टिहीन संघ का शर्टलेस होकर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन,चक्का जाम, 918 दिनों से शिमला में अपनी मांगों को लेकर बैठे हैं धरने पर।

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शिमला, सुरेंद्र राणा:  पिछले 918 दिनों  से शिमला में दृष्टिहीन जन संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। शिमला के  में ये लोग पिछले लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। हिमाचल के इतिहास में ये सबसे लंबा आंदोलन माना जा रहा है। मांगे पूरी न होने पर समय समय पर ये चक्का जाम करते रहें हैं। आज फ़िर सचिवालय के बाहर अर्धनग्न होकर संघ के सदस्यों ने चक्का जाम कर दिया। जिससे शिमला शहर की रफ़्तार थम गई।

दृष्टिहीन जन संगठन के सचिव राजेश ठाकुर ने बताया कि वह विभिन्न विभागों में खाली पड़े  दृष्टिहीनों कोटे के बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरने की मांग कर रहे हैं। सरकार से कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं, जिसके चलते दृष्टिहीन संघ धरने के साथ कई बार चक्का जाम कर चुका है। जब वह चक्का जाम करते हैं तो उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जाता है। लेकिन बाद में कुछ नहीं होता।

उन्होंने  कहा कि पिछली सरकार द्वारा दिव्यांगों के लिए शुरू की गई सहारा योजना के तहत जो तीन हज़ार प्रति माह दिया जाता था उसे भी सुक्खू सरकार ने बंद कर दिया है। मुफ्त बस सुविधा के लिए हिम बस कार्ड बनाने के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। सरकार उनके प्रति असंवेदनशील बनी हुई है।

गौरतलब है कि दृष्टि बाधित संघ शिमला में अपनी मांगों को लेकर 918 दिनों से धरने पर बैठा है। दृष्टि बाधित सरकार से बैक लॉग कोटे के खाली पड़े पदों को एकमुश्त भरने की मांग कर रहे हैं। दृष्टि बाधितों का कहना है कि 1995 के बाद उनके कोटे के पद सरकार भर नहीं रही है -जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी भर्तियों के आदेश दिए हैं।

2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में दृष्टिबाधित  व्यक्तियों की कुल संख्या लगभग 16,613 थी, जिनमें 8,815 पुरुष और 7,798 महिलाएं शामिल थीं। राज्य में दृष्टिबाधितों के लिए विशेष आईटीआई और स्कूलों की सुविधा उपलब्ध है।  सरकारी विभागों में दृष्टिबाधितों के लिए 1,100 से अधिक पद खाली हैं।

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