शिमला, सुरेंद्र राणा: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और प्रधानमंत्री का हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन को किसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे के बजाय विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला करने वाला करार दिया है।राठौर ने कहा कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं तो देश को किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार करीब 29 मिनट के संबोधन में उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दलों को निशाना बनाया। प्रधानमंत्री का भाषण चुनावी सभा जैसा लग रहा था, खासकर तब जब तमिल नाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल है।कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है, ऐसे में इसे दोबारा राजनीतिक मुद्दा बनाकर भाजपा चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रही है। सरकार ने 16 अप्रैल को इसे परिसीमन से जोड़ते हुए नोटिफाई किया, जबकि नई जनगणना प्रस्तावित है। ऐसे में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है। भाजपा अच्छी तरह जानती थी कि इस विधेयक को पारित कराने के लिए उसके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, फिर भी विशेष सत्र बुलाया गया। यह पूरा घटनाक्रम पहले से तय रणनीति के तहत किया गया ताकि विपक्ष को महिला विरोधी साबित किया जा सके जबकि हकीकत में महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने में कांग्रेस की भूमिका ऐतिहासिक रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिला। वहीं इंदिरा गांधी के कार्यकाल में महिलाओं को संपत्ति में अधिकार जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। दूसरी तरफ भाजपा ने महिलाओं के हित में ऐसा कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर समाज को बांटने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। भाजपा धर्म और जाति के आधार पर राजनीति कर रही है और अब महिला आरक्षण को भी चुनावी हथियार बनाया जा रहा है।कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाया है। कांग्रेस की पहली राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला थीं, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कांग्रेस से थीं और पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार भी कांग्रेस के कार्यकाल में बनीं। भाजपा द्वारा कांग्रेस पर महिला विरोधी होने के आरोप निराधार हैं। भाजपा खुद महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देती और लोकसभा चुनावों में भी महिलाओं को बहुत कम टिकट दिए जाते हैं। कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता के बीच जाएगी और भाजपा की मंशा को उजागर करेगी। देश की महिलाएं भाजपा की राजनीति को समझती हैं और महिला आरक्षण के नाम पर किया जा रहा राजनीतिक प्रयास सफल नहीं होगा।
