शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लकड़ी की तस्करी, पेड़ का अवैध कटान समेत अन्य वन मामलों में बिना वारंट के गिरफ्तार करने के पुराने फैसले को पलटते हुए नई कानूनी व्याख्या स्पष्ट की है। अदालत ने कहा है कि इस कानून के तहत पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है और यह अपराध संज्ञेय माना जाएगा। भले ही यह अपराध बिना वारंट गिरफ्तारी योग्य है, लेकिन यह जमानती बने रहेंगे।
वन अधिनियम की धारा 65 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को बांड भरने पर रिहा किया जा सकता है। अदालत के इस फैसले के बाद प्रदेश में लकड़ी की तस्करी और अवैध कटान पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। पहले अपराध असंज्ञेय श्रेणी में होने के कारण अधिकारियों के हाथ बंधे होते थे लेकिन अब ऐसे मामलों में तत्काल सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। अपराध संज्ञेय श्रेणी में आता है कि नहीं, एकल जज ने कहा इस मामले को कानूनी विचार के लिए फुल बेंच को रेफर कर दिया था। भारतीय वन अधिनियम की धारा 42 और हिमाचल प्रदेश वन उपज पारगमन (भूमि मार्ग) नियम के तहत आने वाले अपराध अब संज्ञेय है। अदालत ने व्यवस्था दी है कि इसका अर्थ है कि अब पुलिस या वन अधिकारी इन मामलों में आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं।
