शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन अधिकारों की बहाली और उन पर हो रहे हमलों के खिलाफ सीटू ने मंगलवार को शिमला स्थित कुमार हाउस बिजली बोर्ड मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
सीटू प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि वर्तमान समय में बिजली बोर्ड प्रबंधन ट्रेड यूनियन नेताओं को चार्जशीट, निलंबन और जबरन तबादलों के जरिए निशाना बना रहा है, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उन्होंने मांग की है कि यह कार्रवाई तुरंत रद्द की जाए और प्रदेशभर के फील्ड कार्यालयों में गेट मीटिंग, धरना, रैली जैसी लोकतांत्रिक गतिविधियों पर लगी रोक को तुरंत हटाया जाए। मेहरा ने कहा कि यह सब भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ रही आवाज़ को दबाने की साजिश है। बिजली बोर्ड मुख्यालय में यूनियन को संविधान और ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोका जा रहा है। यह तानाशाही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनविरोधी नवउदारवादी नीतियों के कारण प्रदेश का सार्वजनिक क्षेत्र बर्बादी की कगार पर है। हिमाचल प्रदेश के 28 लाख बिजली उपभोक्ता और करीब 16 हजार बिजली कर्मचारी इन नीतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड के निजीकरण की कोशिशें लंबे समय से चल रही हैं, जिन्हें बिजली विधेयक 2022 के माध्यम से और बल मिला है। स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को भी उन्होंने इसी निजीकरण अभियान का हिस्सा बताया।
मेहरा ने दावा किया कि स्मार्ट मीटरों के नाम पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिनमें से लगभग 1,000 करोड़ रुपये का खर्च अनावश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश सरकार पहले ही 13 लाख उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है, तो फिर मीटर बदलने की क्या जरूरत है? इसे उन्होंने खुला भ्रष्टाचार करार दिया। सीटू ने 7 अगस्त को शिमला में होने वाली बिजली कर्मचारियों की रैली को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की और कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए उनके संघर्ष के साथ एकजुटता प्रकट की।
