शिमला, सुरेन्द्र राणा; हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कल्याण समिति ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव आशीष सिंघमार से पूछा है कि ‘सुख-आश्रय योजना’ के लिए मिले बजट में से 85 करोड़ रुपये की एफडी बनाकर बैंक में क्यों रखे गए हैं। समिति ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 98 करोड़ रुपये जारी किए थे, और यदि वह खर्च नहीं हो पा रहे हैं, तो यह राशि उन विभागों को दी जानी चाहिए जहां बजट की कमी के कारण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। जानकारी के अनुसार, इस योजना के लिए सरकार ने बजट में कुल 101 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था।
समिति की यह दो दिवसीय बैठक समिति अध्यक्ष मोहन लाल ब्राक्टा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विधायकों विनोद कुमार, रणधीर शर्मा, रीना कश्यप, लोकेन्द्र कुमार, विनोद सुल्तानपुरी और अनुराधा राणा ने भाग लिया। बैठक के दौरान अधिकारियों से मौखिक विभागीय रिपोर्ट के तहत एफडी से जुड़ी जानकारी मांगी गई।
सदस्यों ने सचिव को यह भी बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत संचालित ‘शगुन योजना’ में कई मामलों में विवाह के तीन, छह या एक साल बाद लाभार्थी युवतियों को राशि मिलती है, जो चिंता का विषय है। समिति ने सुझाव दिया कि युवती के विवाह से 15 दिन पहले आवेदन भरा जाए और विवाह से सात दिन पूर्व ही राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
