शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र पुराना होने के आधार पर किसी का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता है। प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख चाहे जो भी हो, व्यक्ति उसी श्रेणी से संबंधित रहेगा। पुराना होने से याचिकाकर्ता का स्टेटस नहीं बदल जाएगा। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से नामांकन खारिज करने के आधार को पूरी तरह से अनुचित ठहराया। अदालत ने आदेश रद्द करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को कानून के अनुसार याचिकाकर्ता के नामांकन पर दोबारा फैसला लेने को कहा है। यदि नामांकन स्वीकार होता है, तो उम्मीदवार को चुनाव चिह्न अलॉट किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य चुनाव आयोग की ओर से 29 अप्रैल 2026 को अधिसूचित पंचायतीराज संस्थाओं का चुनावी शेड्यूल किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होना चाहिए।यह है मामलायाचिकाकर्ता प्रदीप कुमार ने कुपवी तहसील की भालू पंचायत से 11 मई को प्रधान पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। 12 मई को रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनका अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बहुत पुराना है और उसमें तारीख साफ नहीं है। साथ ही एसडीएम चौपाल के कार्यालय के एक पुराने केस का हवाला देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता सुनार जाति से संबंध रखता है, जो एससी श्रेणी में नहीं है। याचिकाकर्ता को 23 मार्च 2004 को कार्यकारी मजिस्ट्रेट कुपवी की ओर से भरीड़ा जाति का एससी प्रमाण पत्र जारी किया गया था। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, भरीड़ा को ठठेरा भी कहा जाता है। केंद्र और राज्य सरकार के 1977 के आदेशों के तहत ठठेरा जाति अनुसूचित जाति की सूची में क्रम संख्या 56 पर दर्ज है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि जिस केस नंबर 4/2006 का हवाला देकर उनको सुनार बताया गया, वह केस असल में उनका था ही नहीं।
