पंजाब DA-DR बकाया मामले में हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करती पंजाब सरकार

पंजाब दस्तक Exclusive / विशेष प्रशासनिक-कानूनी पड़ताल

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​डीए-डीआर विवाद: हाईकोर्ट के कड़े रुख के आगे बैकफुट पर मान सरकार; मुख्य सचिव ने सौंपी राजकोषीय संकट और बकाए की पूरी फाइल

​अदालत का ₹1 लाख जुर्माना भरा; 50% किया डीए, पर ₹32,418 करोड़ की कुल देनदारी एकमुश्त चुकाने से सरकार का इंकार — मामला अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में!

​रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ (पंजाब दस्तक, चंडीगढ़ न्यूज़ रूम)
राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तीखे डंडे के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने अदालत में अपनी स्थिति साफ कर दी है। पंजाब के मुख्य सचिव (Chief Secretary) ने हाईकोर्ट में एक विस्तृत जवाबी हलफनामा (Status Report) पेश करते हुए पंजाब के खजाने की मौजूदा हालत, कानूनी पेचीदगियों और कर्मचारियों के हजारों करोड़ के पेंडिंग बकाए का पूरा ब्योरा अदालत की मेज पर रख दिया है।


​हाईकोर्ट का कड़ा डंडा और ₹1 लाख का जुर्माना जमा
​उल्लेखनीय है कि 27 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने प्रशासनिक हीला-हवाली पर सख्त नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को 3 दिनों में जवाब दाखिल करने का फरमान सुनाया था। अदालत ने दो टूक पूछा था कि:
​कर्मचारियों का जायज डीए और डीआर का बकाया अब तक क्यों अटका कर रखा गया है?
​17 अगस्त 2026 को वित्त विभाग द्वारा जारी उस फरमान का क्या आधार था, जिसमें अदालती फैसलों पर रोक लगाने जैसी भाषा का इस्तेमाल हुआ था?
​अदालत ने ढिलाई बरतने पर राज्य सरकार पर ₹1 लाख की पेनाल्टी भी लगाई थी। मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि सरकार ने 30 अक्टूबर को ही यह ₹1 लाख का जुर्माना सरकारी खाते में जमा करवा दिया है।


​42% से 50% किया डीए; पर ₹32,418 करोड़ का वित्तीय पहाड़ खड़ा!
​पंजाब दस्तक द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार की इस स्टेटस रिपोर्ट में कर्मचारियों की देनदारी से जुड़े भारी-भरकम आंकड़े सामने आए हैं:
​8% की बढ़ोतरी लागू: 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और कर्मचारी यूनियनों के बीच हुई वार्ता के बाद 23 सितंबर को अधिसूचना जारी की गई। इसके तहत डीए 42% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया, जो अक्टूबर में मिले सितंबर के वेतन/पेंशन के साथ दिया जा चुका है।


​पे-कमिशन का ₹9,600 करोड़ पेंडिंग: छठे वेतन आयोग (2016-2021) के एरियर का कुल आंकड़ा ₹14,191 करोड़ था। सरकार ने 5 साल की चरणबद्ध योजना बनाई थी (जिसमें 85 वर्ष से अधिक, फिर 75 से 85 वर्ष और फिर अन्य को तरजीह दी गई)। इसमें से कई किश्तें दी जा चुकी हैं, लेकिन ₹9,600 करोड़ का बकाया अभी भी अटका पड़ा है।
​केंद्र के बराबर 60% डीए का दबाव: यदि केंद्रीय दरों (60%) के अनुरूप बकाया जोड़ा जाए, तो यह राशि ₹22,818 करोड़ बैठती है।
​महा-वित्तीय संकट (₹32,418 करोड़): पुराने ₹9,600 करोड़ और नए ₹22,818 करोड़ को मिलाकर कुल देनदारी ₹32,418 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े पर पहुंच गई है।


​एकमुश्त भुगतान से हाथ खड़े, सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
​मुख्य सचिव की रिपोर्ट में राज्य सरकार ने अपनी असमर्थता जताते हुए कहा है कि:
​पंजाब का सालाना वेतन और पेंशन का बजट ही ₹58,064 करोड़ का है।
​यदि यह सारा बकाया एक साथ दिया जाता है, तो राजकोष पर हर साल ₹4,712 करोड़ रुपये का अतिरिक्त स्थाई बोझ पड़ जाएगा, जिसे झेलना राज्य के लिए नामुमकिन है।
​इसी वजह से पंजाब सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में एसएलपी (SLP) दाखिल की हुई है।


​विवादित चिट्ठी पर गमाडा-वित्त विभाग का नया स्पष्टीकरण
​17 अगस्त के विवादित पत्र पर सरकार ने सफाई दी है कि उसका मकसद हाईकोर्ट के आदेश को टालना नहीं था, बल्कि सभी विभागों से वित्तीय खर्च का अनुमान मंगवाना था। भ्रम दूर करने के लिए वित्त विभाग ने 29 अक्टूबर 2026 को नया परिपत्र (New Circular) जारी कर सभी विभागों से कर्मचारियों पर आने वाले संभावित वित्तीय खर्च की पूरी जानकारी मांगी है।
​सरकार का कहना है कि वह पूरी साफ नीयत के साथ कदम बढ़ा रही है, परंतु ₹32,418 करोड़ का एकमुश्त भुगतान खजाने के बूते से बाहर है। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं के वकील सरकार के इन तर्कों का किस तरह जवाब देते हैं।


​पंजाब दस्तक की विशेष अपील
​”कर्मचारियों का हक़ हो, प्रशासनिक सुस्ती हो या जनता के मुद्दे — ‘पंजाब दस्तक’ हमेशा निष्पक्षता और पक्के सबूतों के साथ सच की आवाज़ उठाता रहेगा।
​यदि आपके क्षेत्र में भी कर्मचारियों, पेंशनरों या शासन-प्रशासन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है, तो पंजाब दस्तक को जरूर भेजें। हम आपकी बात सरकार के कानों तक पहुंचाएंगे।


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