वरिष्ठ पत्रकार: प्रियंका (पंजाब दस्तक)
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य के अधिकारों की लड़ाई में एक ऐतिहासिक और बड़ी जीत दर्ज की है। वर्षों से चले आ रहे प्रसिद्ध ग्रैंड होटल ‘वाइल्ड फ्लावर हॉल’ के संचालन विवाद में ओबेरॉय ग्रुप को आखिर हिमाचल सरकार की शर्तों के आगे झुकना पड़ा है। दोनों पक्षों के बीच हुए नए समझौते के तहत अब होटल के कुल मुनाफे का 47 फीसदी हिस्सा सीधे हिमाचल सरकार के खजाने में जाएगा।
35 साल की लीज, 400 करोड़ रुपये पहले ही जमा
नए करार के अनुसार होटल की लीज अवधि 35 वर्षों के लिए तय की गई है। इतना ही नहीं, ओबेरॉय ग्रुप इस पूरी व्यवस्था के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि हिमाचल प्रदेश सरकार को पहले ही हस्तांतरित कर चुका है। इस नए प्रबंधन मॉडल से होटल का संचालन तय कानूनी व प्रशासनिक शर्तों के तहत ही संचालित होगा।
”हक के लिए आखिरी सांस तक जंग जारी रहेगी” — CM सुक्खू
इस बड़ी उपलब्धि के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कड़ा और बेबाक बयान सामने आया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि प्रदेश की संपत्ति और जनता के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। CM ने दोहराया:
”हिमाचल के हितों की रक्षा करना हमारी पहली प्राथमिकता है। राज्य के हक और अधिकारों के लिए मैं अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ता रहूँगा।”
हिमाचल प्रदेश के लिए क्यों खास है यह जीत?
नियमित और बंपर कमाई: 47% मुनाफा शेयर से राज्य सरकार को हर साल निश्चित और बड़ा राजस्व प्राप्त होगा।
दशकों पुराने विवाद पर विराम: होटल के स्वामित्व और संचालन से जुड़ा लंबा कानूनी बखेड़ा अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
टूरिज्म सेक्टर को नया बूस्ट: वाइल्ड फ्लावर हॉल जैसे विश्वस्तरीय होटल के सुगम संचालन से हिमाचल के पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
स्थानीय रोजगार को मजबूती: राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
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